लखनऊ के जानकीपुरम सेक्टर-जी निवासी 85 वर्षीय बदरुद्दीन अंसारी साइबर ठगी का शिकार हुए हैं. जालसाजों ने 7 मार्च को पुलिस अधिकारी बनकर उन्हें कॉल किया और पुणे के एक मनी लॉन्ड्रिंग केस में उनका नाम होने का डर दिखाया. ठगों ने गिरफ्तारी का डर दिखाकर बुजुर्ग को 27 दिनों तक डिजिटल अरेस्ट में रखा. इस दौरान डरा-धमकाकर पीड़ित से 11 मार्च से 4 अप्रैल के बीच कुल 84 लाख 50 हजार रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए. पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की है.
पुलिस और एटीएस अधिकारी बनकर दी धमकी
ठगों ने खुद को लखनऊ हेडक्वार्टर का सीनियर इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार मिश्रा बताकर पीड़ित से संपर्क किया था. उन्होंने दावा किया कि बदरुद्दीन के नाम पर एचडीएफसी बैंक में फर्जी खाता खोलकर अवैध लेनदेन हुआ है.
इसके बाद व्हाट्सऐप और सिग्नल ऐप पर एनआईए, सुप्रीम कोर्ट और आरबीआई के फर्जी दस्तावेज भेजे गए. खुद को एटीएस अधिकारी बताने वाले अन्य आरोपियों ने भी बुजुर्ग पर मानसिक दबाव बनाए रखा, जिससे डरकर उन्होंने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी ठगों के हवाले कर दी.
21 दिन बाद टूटी चुप्पी, जांच शुरू
भारी नुकसान और मानसिक प्रताड़ना के बाद पीड़ित 21 दिन बाद साइबर थाने पहुंचे. साइबर थाना प्रभारी बृजेश यादव के अनुसार, पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगों के खातों में मौजूद 27 लाख रुपये फ्रीज करा दिए हैं. शेष राशि का पता लगाने के लिए बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की जा रही है. पुलिस अब उन नंबरों और खातों को ट्रेस कर रही है जिनके जरिए इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया.
आशीष श्रीवास्तव