कानपुर कचहरी में अधिवक्ता प्रियांशु श्रीवास्तव ने पांचवीं मंजिल से छलांग लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली. प्रियांशु ने यह आत्मघाती कदम अपने पिता राजेंद्र कुमार श्रीवास्तव की कथित सख्ती और मानसिक प्रताड़ना से तंग आकर उठाया. मृतक ने आत्महत्या से ठीक पहले व्हाट्सएप पर दो पन्नों का स्टेटस नोट साझा किया था. इस नोट में उन्होंने बचपन की कड़वी यादों और वर्तमान की बंदिशों का विस्तार से जिक्र किया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और व्हाट्सएप स्टेटस को जांच का मुख्य आधार बनाया है.
बचपन की कड़वाहट और 'नंगा' करने का आरोप
प्रियांशु ने सुसाइड नोट में पिता पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने लिखा कि बचपन में फ्रिज से आम का जूस पीने पर पिता ने उन्हें नंगा करके घर से निकाल दिया था. हाईस्कूल में कम नंबर आने पर भी उनके साथ ऐसा ही व्यवहार करने की धमकी दी गई थी.
प्रियांशु के मुताबिक, पिता हर समय उन पर नजर रखते थे, जिससे उन्हें मोहल्ले में बेइज्जती महसूस होती थी. नोट में लिखा गया कि 'भगवान मेरे जैसे पिता किसी को न दे', और अंत में यह इच्छा जताई कि उनके पिता उनके शव को हाथ न लगाएं.
करियर की घुटन और अपनी पहचान की जंग
25 वर्षीय प्रियांशु खुद भी वकील थे और अपने पिता के चैंबर में ही काम करते थे. नोट में उन्होंने अपनी पहचान न होने का दर्द बयां किया. उन्होंने लिखा कि उनका न कोई अपना चैंबर है और न ही कोई ऑफिस, वे दिन भर पिता के लिए ही काम करते रहते हैं. उन्हें महसूस होता था कि उनकी कोई अहमियत नहीं है. प्रियांशु के अनुसार, वे किसी गलत संगत में नहीं थे, फिर भी पिता की बेवजह की सख्ती ने उन्हें मौत के रास्ते पर ढकेल दिया.
कचहरी में गमगीन माहौल और पुलिस जांच
घटना के बाद बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और जज मौके पर पहुंचे. डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है. वहीं, बेटे की मौत से वकील पिता बेहाल हैं और कुछ भी बोलने की स्थिति में नहीं हैं. कानपुर कचहरी के हजारों वकीलों के बीच यह सुसाइड नोट चर्चा का केंद्र बना हुआ है. पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह केवल पारिवारिक विवाद था या इसके पीछे अन्य कारण भी थे.
नोट:- (अगर आपके या आपके किसी परिचित के मन में आता है खुदकुशी का ख्याल तो ये बेहद गंभीर मेडिकल एमरजेंसी है. तुरंत भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 पर संपर्क करें. आप टेलिमानस हेल्पलाइन नंबर 1800914416 पर भी कॉल कर सकते हैं. यहां आपकी पहचान पूरी तरह से गोपनीय रखी जाएगी और विशेषज्ञ आपको इस स्थिति से उबरने के लिए जरूरी परामर्श देंगे. याद रखिए जान है तो जहान है.)
रंजय सिंह