'सवाल व्यक्तिगत है, इसलिए मैं...' प्रतीक यादव के तलाक से जुड़े पोस्ट पर अपर्णा यादव ने दिया ये जवाब

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव हरदोई में एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचीं. इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने प्रतीक यादव के तलाक से जुड़े सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पूछे गए सवालों पर बेहद संक्षिप्त और स्पष्ट प्रतिक्रिया दी. अपर्णा यादव ने कहा कि यह व्यक्तिगत मामला है, इसलिए वह इस तरह के सवालों से बच रही हैं.

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अपर्णा यादव ने प्रतीक यादव की पोस्ट पर दिया संक्षिप्त जवाब. (Photo: Screengrab) अपर्णा यादव ने प्रतीक यादव की पोस्ट पर दिया संक्षिप्त जवाब. (Photo: Screengrab)

प्रशांत पाठक

  • हरदोई,
  • 25 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:26 PM IST

उत्तर प्रदेश के हरदोई में एक निजी कार्यक्रम में शामिल होने हरदोई पहुंचीं प्रदेश महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने प्रतीक यादव के तलाक संबंधी पोस्ट पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि यह मामला व्यक्तिगत है, इसलिए ऐसे सवालों से बच रही हूं. अपर्णा से जब पूछा गया कि वे व्यक्तिगत सवालों से क्यों बच रही हैं, जबकि सोशल मीडिया पर यह मामला छाया हुआ है, तो उन्होंने कहा कि आपने खुद ही कहा है कि सवाल व्यक्तिगत है, इसलिए मैं बच रही हूं.

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इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक-प्रशासनिक मामलों में जांच ही सही रास्ता है. शंकराचार्य को लेकर चल रहे मामले पर भी उन्होंने बात की, जिसमें शंकराचार्य द्वारा मुख्यमंत्री को लेकर टिप्पणी की गई थी, इस पर अपर्णा यादव ने कहा कि सनातन धर्म में चार शंकराचार्यों की व्यवस्था आदि गुरु शंकराचार्य ने स्थापित की है. ऐसे में यह एक तथ्यात्मक विषय है कि किसी व्यक्ति के पास शंकराचार्य की उपाधि है या नहीं.

उन्होंने कहा कि फिलहाल यह तथ्य उनके सामने उपलब्ध नहीं है. अपर्णा ने कहा कि अगर किसी आयोजन या मेले के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में कमी रही है, तो कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं है. कानून-व्यवस्था सबके लिए समान है.

यह भी पढ़ें: 'मेरे और प्रतीक को अलग करने की साजिश रचने वालों की हो गई पहचान...' तलाक वाली पोस्ट पर बोलीं अपर्णा यादव

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उन्होंने कहा कि कुंभ या अन्य सनातन मेलों में बड़ी संख्या में आम जनता होती है, ऐसे में यदि अव्यवस्था होती है तो वह जांच का विषय है. इस मामले में छींटाकशी करना या मुख्यमंत्री के लिए इस तरह की भाषा का प्रयोग करना गलत है. उन्होंने कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी स्वयं एक संत हैं और संतों को गुस्से जैसी बातों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वैधता पर सवाल उठाया है और क्या यह आस्था पर सवाल नहीं है, तो अपर्णा यादव ने कहा कि वह किसी की वैधता पर सवाल नहीं उठा रही हैं. उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में गुरु परंपरा और शंकराचार्य की जो व्यवस्था है, उसके बारे में जानकारी होना सभी के लिए आवश्यक है. यह कहना कि कोई वैध है या अवैध, उनका उद्देश्य नहीं है.

उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन की रिपोर्ट सही है और नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो कोई भी व्यक्ति संविधान से ऊपर नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि उनके गुरुदेव और अन्य व्यवस्थित शंकराचार्यों की रथ यात्राएं हमेशा आदर और सम्मान के साथ संपन्न होती रही हैं और कभी ऐसी अव्यवस्था नहीं हुई. यदि इस मामले में कुछ गलत हुआ है, तो इसकी जांच होनी चाहिए कि कैसे और क्यों हुआ. प्रशासन ने क्या किया, किस अधिकारी ने क्या भूमिका निभाई, यह सब जांच का विषय है.

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वहीं मुरादाबाद में हिंदू लड़की को बुर्का पहनाए जाने की घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए अपर्णा यादव ने कहा कि इस मामले में एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

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