उत्तर प्रदेश के हापुड़ में लोग जिस सॉस को चटखारे लेकर खा रहे थे, वह टमाटर से नहीं, बल्कि एक ऐसी मिलावट से बन रहा था, जिसे सुनकर ही हैरानी होती है. चंडी रोड पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जब एक दुकान पर छापा मारा, तो सामने आई तस्वीर ने सबको चौंका दिया. लाल-लाल दिखने वाला सॉस, जिसे लोग स्वाद समझकर खरीद रहे थे, उसमें टमाटर नाम की चीज लगभग गायब थी.
अधिकारियों के मुताबिक, इस सॉस को बनाने के लिए सोडियम, नमक और गाजर का इस्तेमाल किया जा रहा था. ऊपर से इसे बिल्कुल बाजार वाले ब्रांडेड सॉस जैसा लाल दिखाने के लिए कृत्रिम रंग मिलाया जाता था. यानी बोतल में जो दिख रहा था, वह खाने की चीज कम और मिलावट का खेल ज्यादा था. पैकिंग ऐसी कि पहली नजर में कोई भी धोखा खा जाए.
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खाद्य सुरक्षा टीम को शिकायत मिली थी कि इलाके में लंबे समय से नकली सॉस तैयार कर बेचा जा रहा है. इसके बाद टीम ने अचानक छापा मारा. दुकान के अंदर जो मिला, उसने पूरे धंधे की पोल खोल दी. बड़ी मात्रा में तैयार सॉस, केमिकल जैसा कच्चा माल और पैकिंग का सामान मौके पर मिला. अधिकारियों ने तुरंत कार्रवाई करते हुए करीब 30 पेटी सॉस सीज कर दी.
सोचिए, जो सॉस बच्चों के समोसे, चाउमीन, मोमोज और स्नैक्स के साथ रोज खाया जा रहा था, वह असल में किस चीज से बना था. खाने की चीजों में मिलावट की खबरें नई नहीं हैं, लेकिन इस बार मामला सीधे उस सॉस से जुड़ा है जो लगभग हर घर की रसोई में मिल जाता है.
सहायक आयुक्त खाद्य सुनील कुमार ने बताया कि मौके से सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी. विभाग यह भी पता लगा रहा है कि यह नकली सॉस शहर के किन-किन बाजारों और दुकानों तक पहुंच चुका था.
इस छापेमारी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है- क्या हम जो खा रहे हैं, वह सच में खाना है या सिर्फ रंग, नमक और केमिकल का मिश्रण? हापुड़ की यह कार्रवाई सिर्फ एक दुकान का भंडाफोड़ नहीं, बल्कि उस पूरे मिलावट नेटवर्क की झलक है, जो चुपचाप लोगों की थाली तक पहुंच रहा है. विभाग यह भी जांच कर रहा है कि यह मिलावटी सॉस किन-किन इलाकों में सप्लाई की जा रही थी और कितने समय से यह कारोबार चल रहा था.
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