वाराणसी में गंगा में नाव पर सवार होकर इफ्तार पार्टी करने और चिकन बिरयानी खाने के मामले में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. 14 मुस्लिम आरोपियों को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है. अब सभी आरोपी 1 अप्रैल 2026 तक जेल में रहेंगे. इस मामले में अगली सुनवाई 23 मार्च 2026 को होगी, जब उनकी जमानत याचिका पर विचार किया जाएगा.
बताया जा रहा है कि रमजान के दौरान गंगा में नाव पर इफ्तार करते समय चिकन बिरयानी खाने और बची हड्डियों को गंगा में फेंकने का वीडियो सामने आया था. इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.
गंगा में इफ्तार पार्टी मामले में 14 आरोपी जेल भेजे गए
मामले में आज एसीजेएम-9 की अदालत में पेशी हुई. कोर्ट ने गंभीर धाराओं को देखते हुए सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि सभी आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री पेश की जाए, जिसके आधार पर आगे की सुनवाई होगी.
पुलिस के अनुसार इस मामले में आईटी एक्ट की धारा 67 के साथ बीएनएस की धारा 365 और 308(5) भी जोड़ी गई है. यह धाराएं नाव संचालक अनिल साहनी और सहसंचालक रंजन साहनी द्वारा लगाए गए अपहरण और धमकी के आरोपों के बाद जोड़ी गईं.
कोर्ट ने आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री मांगी
कोर्ट में पेशी के दौरान सभी आरोपी रोते नजर आए. उन्होंने कान पकड़कर माफी भी मांगी और अपनी गलती स्वीकार की. हालांकि गंभीर आरोपों के चलते कोर्ट ने उन्हें राहत नहीं दी और जेल भेजने का आदेश दिया. इस दौरान कचहरी परिसर में भारी पुलिस बल तैनात रहा और पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर दिया गया. सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे.
23 मार्च को जमानत याचिका पर होगी अगली सुनवाई
वहीं हिंदू पक्ष के वकील शशांक शेखर त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि उन्हें कोर्ट परिसर में धमकी दी गई. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने बेल याचिका को स्वीकार नहीं किया और सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपियों ने गंगा और सनातन परंपराओं का अपमान किया है, जिसे कोर्ट ने गंभीरता से लिया है. फिलहाल सभी आरोपियों की क्रिमिनल हिस्ट्री का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद ही जमानत पर फैसला होगा.
रोशन जायसवाल