594 किमी लंबा गंगा एक्सप्रेसवे आधुनिक इंजीनियरिंग का बेजोड़ नमूना है. इसे हर मौसम के अनुकूल बनाने के लिए 100mm मोटी डामर परत और अत्याधुनिक 'कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो' (CBR) तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. 500mm मोटे कैरिजवे और स्विस सेंसर तकनीक से लैस यह एक्सप्रेसवे न केवल भारी ट्रैफिक का दबाव झेलेगा, बल्कि AI के जरिए सफर को सुरक्षित भी बनाएगा. यह तकनीकी मजबूती प्रदेश में उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खोलने के लिए तैयार है. आइये जानते हैं टोल दरों से लेकर मजबूती के 'सीक्रेट' तक सबकुछ...
फिलहाल वाहन बिना टोल दिए दौड़ेंगे
उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल वाहन बिना टोल दिए दौड़ेंगे. टोल दरें तय कर दी गई हैं, लेकिन वसूली शुरू होने में अभी करीब 15 दिन का समय लग सकता है. 15 दिन बाद टोल शुरू किया जाएगा जिसको लेकर यूपीडा ने इसके लिए निर्देशित किया है. एक्सप्रेसवे पर वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है.
15 दिन बाद टोल वसूली शुरू
जुपिटर की चीफ इंजीनियर राज चौधरी के मुताबिक, UPEIDA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि स्वतंत्र अभियंता द्वारा 28 अप्रैल 2026 को प्रोविजनल सर्टिफिकेट जारी किए जाने के बाद टोल वसूली शुरू की जा सकती थी, लेकिन सार्वजनिक हित मे इसे 15 दिन के लिए टाल दिया गया है. ऐसे लोगों को एक्सप्रेसवे के बारे में पूरी तरीके से पता भी चल जाएगा.
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए दोपहिया, तिपहिया और पंजीकृत ट्रैक्टरों पर 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर टोल तय किया गया है. वहीं कार, जीप, वैन और हल्के वाहनों के लिए 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर शुल्क देना होगा. हल्के कॉमर्शियल वाहनों के लिए यह दर 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर रखी गई है.
मिनी बस, बस और ट्रकों के लिए 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर टोल तय किया गया है. भारी निर्माण मशीनरी और मिट्टी हटाने वाले वाहनों के लिए 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर शुल्क देना होगा. जबकि सात या उससे अधिक एक्सल वाले बड़े बहुएक्सल वाहनों पर 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर टोल लगाया जाएगा.
एक्सप्रेसवे की मजबूती का 'सीक्रेट'
594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे को हर मौसम के अनुकूल बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. सड़क पर 100 मिलीमीटर मोटी डामर परत बिछाई गई है, जो भीषण गर्मी और अत्यधिक बारिश में भी सड़क को सुरक्षित रखेगी. इसके निर्माण में लाखों टन डामर, स्टील, सीमेंट और रेत का उपयोग किया गया है.
अपनाई गई कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो यानी सीबीआर तकनीक
UPEIDA अधिकारियों के अनुसार एक्सप्रेसवे की मजबूती के लिए कैलिफोर्निया बेयरिंग रेशियो यानी सीबीआर तकनीक अपनाई गई है, जिसकी वैल्यू 8 रखी गई है. मुख्य कैरिजवे (सड़क का वह पक्का हिस्सा है जिस पर वाहनों का आवागमन होता है) की कुल मोटाई 485 से 500 मिलीमीटर तक है, जिससे यह सड़क भारी ट्रैफिक का दबाव आसानी से झेल सकेगी. इसकी भार क्षमता 79 से 108 मिलियन स्टैंडर्ड एक्सल तक मापी गई है.
यात्रा को और सुरक्षित व आरामदायक बनाने के लिए गंगा एक्सप्रेसवे पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक स्विस सेंसर तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है. दावा है कि यह एक्सप्रेसवे न केवल यात्रा समय घटाएगा, बल्कि प्रदेश में उद्योग, पर्यटन और रोजगार को भी नई रफ्तार देगा.
आशीष श्रीवास्तव