नोएडा में युवराज की मौत ने देश को झकझोर दिया है. इस मामले ने शासन और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. इस हादसे से सवाल खड़ा होता है कि करोड़ों रुपये खर्च कर एनसीआर के शहरों में खरीदे गए आशियाने क्या वाकई महफूज हैं. ग्राउंड की स्थिति यह है कि ग्रेटर नोएडा के कई इलाकों में लापरवाही के ऐसे 'ब्लैक स्पॉट' मौजूद हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं.
गौड़ सिटी-2 के पास सर्विस लेन और गहरे नाले के बीच का फर्क खत्म हो गया है, जहां न तो दीवारें हैं और न ही कोई चेतावनी बोर्ड. गौड़ सिटी-1 के सामने भी सड़क और नाला बिल्कुल समतल हैं, जिससे कोहरे में वाहन चालक अनियंत्रित होकर गिर सकते हैं.
टेकजोन-4 बिसरख में युवराज के मामले के बाद अब प्रशासन जाग रहा है और आनन-फानन में चेतावनी की पट्टियां लगाई जा रही हैं. यह सब एक मासूम की जिंदगी खत्म होने के बाद शुरू हुआ है.
गौर सिटी-2: सर्विस लेन के साथ मौत का सफर
दिल्ली-मेरठ हाईवे को यमुना एक्सप्रेस-वे से जोड़ने वाली सड़क के किनारे बने सर्विस लेन की स्थिति भयावह है. यहां नाले और सड़क के बीच का अंतर पूरी तरह खत्म हो चुका है. नाले के किनारे न तो ऊंची दीवारें हैं और न ही कोई बैरिकेडिंग की गई है. घने कोहरे या शून्य विजिबिलिटी की स्थिति में कोई भी वाहन चालक सीधे नाले में समा सकता है. प्रशासन की यह अनदेखी किसी भी वक्त बड़े हादसे का कारण बन सकती है.
गौड़ सिटी-1: अनजान राहगीरों के लिए बिछा जाल
गौड़ सिटी-1 के सामने की सड़क पर भी खतरा कम नहीं है. स्थानीय लोगों के मुताबिक, 20 मीटर चौड़े और 12-14 मीटर गहरे नाले की बाउंड्री सड़क के बिल्कुल समतल है. अंधेरे या कोहरे में किसी अनजान शख्स को सड़क और नाले के बीच का अंतर पता ही नहीं चलता. अगर यहां कोई वाहन गिरता है, तो बचाव कर्मियों की कार्यशैली को देखते हुए चालक का बचना मुश्किल नजर आता है.
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गौड़ चौक अंडरपास: सरकारी परियोजना में बड़ी चूक
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में निर्माणाधीन अंडरपास सरकारी लापरवाही का जीता-जागता उदाहरण है. ताज हाईवे पर बन रहे इस अंडरपास के एक हिस्से में साइन बोर्ड तो हैं, लेकिन दूसरी तरफ नाला बिना किसी दीवार के खुला पड़ा है. ओवरटेक करते वक्त या कोहरे में दोपहिया और चार पहिया वाहन सीधे इस नाले का शिकार हो सकते हैं. यह लापरवाही कभी भी किसी की जान ले सकती है.
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टेकजोन-4 बिसरख: हादसे के बाद जागी अथॉरिटी
बिसरख के टेकजोन-4 इलाके में भी सड़क और गहरे नाले का फर्क खत्म हो चुका था. हालांकि, युवराज की मौत के बाद जब मुकदमे दर्ज हुए और प्रशासन ने सख्ती दिखाई, तब नोएडा-ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी की नींद टूटी. अब इस इलाके में सड़क किनारे चेतावनी की पट्टियां लगाने का काम शुरू किया गया है. सवाल यह है कि यह मुस्तैदी किसी की जान जाने से पहले क्यों नहीं दिखाई गई.
आशुतोष मिश्रा