उत्तर प्रदेश के संभल जिले में अपनी प्रशासनिक कार्यशैली से अलग पहचान बनाने वाले IAS अफसर डॉ. राजेंद्र पेंसिया अब देश के टॉप जिला मजिस्ट्रेट्स में शामिल हो गए हैं. संभल के पूर्व जिलाधिकारी और हाल ही में मुरादाबाद के डीएम बने डॉ. पैंसिया को प्रतिष्ठित मैगजीन ‘फेम इंडिया’ के अखिल भारतीय सर्वेक्षण में देश के 100 बेस्ट परफॉर्मिंग जिला मजिस्ट्रेट्स की सूची में जगह मिली है.
खास बात यह है कि डीएम के रूप में यह उनकी पहली पोस्टिंग थी और महज दो साल के कार्यकाल में उन्होंने संभल जैसे पिछड़े जिले की तस्वीर बदलने की कोशिश की. यह सर्वे जिलाधिकारियों का मूल्यांकन प्रशासनिक क्षमता, जवाबदेही, संकट प्रबंधन, संवाद कौशल और विकासोन्मुख सोच जैसे 10 कड़े मानकों पर किया गया.
डॉ. राजेंद्र पेंसिया के दो साल के कार्यकाल में संभल जिले में कई क्रांतिकारी बदलाव देखे गए, जिन्हें प्रदेश स्तर पर सराहा गया:
क्राइसिस मैनेजमेंट (जामा मस्जिद सर्वे)
24 नवंबर 2024 को संभल में जामा मस्जिद सर्वे के दौरान पैदा हुई हिंसक स्थिति को उन्होंने अपनी प्रशासनिक सूझबूझ से संभाला. तुंरत लिए गए फैसलों और शांतिपूर्ण संवाद के जरिए उन्होंने जिले को बड़ी आग में झुलसने से बचा लिया.
शिक्षा का कायाकल्प
'पीएम श्री स्कूलों' और उनके द्वारा शुरू किए गए 'संभल श्री स्कूलों' की चमक आज संभल की नई पहचान है. स्कूलों के आधुनिकीकरण और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर उनके फोकस ने सरकारी स्कूलों के प्रति जनता का नजरिया बदला.
जनसुनवाई और ग्राम चौपाल
ग्रामीण विकास को प्राथमिकता देते हुए उन्होंने 'हर शुक्रवार ग्राम चौपाल' की शुरुआत की. वे खुद गांवों में जाकर जनता की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करते थे, जिससे शासन और जनता के बीच की दूरी कम हुई.
पिछड़ेपन के दाग को धोया
एक समय पिछड़े जिले के रूप में पहचाने जाने वाले संभल की छवि उनके कार्यकाल में बदलती नजर आई. प्रशासनिक सुधारों, विकास कार्यों और ऐतिहासिक पहचान को सामने लाने के प्रयासों से संभल धीरे-धीरे नई पहचान बनाने लगा.
यही कारण रहा कि अपनी पहली डीएम पोस्टिंग में ही डॉ. राजेंद्र पेंसिया ने देश के टॉप 100 और उत्तर प्रदेश के टॉप 8 बेस्ट परफॉर्मिंग जिला मजिस्ट्रेट्स में जगह बनाकर खास उपलब्धि हासिल की.
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