उत्तर प्रदेश में आगरा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक आरोपी ने कानून से बचने के लिए खुद को कागजों में मृत घोषित करा दिया. फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के सहारे उसने कोर्ट से अपने खिलाफ चल रहा मुकदमा भी बंद करवा लिया. लेकिन करीब 12 साल बाद उसकी सच्चाई उजागर हो गई.
यह मामला थाना न्यू आगरा क्षेत्र से जुड़ा है. आरोपी तारा चंद्र शर्मा के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों से जुड़ा एक मामला कोर्ट में चल रहा था. उसके खिलाफ गैर-जमानती वारंट भी जारी हो चुके थे. गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने वर्ष 2013 में नगर निगम से बना फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र कोर्ट में पेश कर दिया, जिसमें उसे वर्ष 1998 में मृत दिखाया गया था.
इस फर्जी दस्तावेज के आधार पर पुलिस ने भी कोर्ट में रिपोर्ट दी. इसके बाद कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ चल रही कार्रवाई को समाप्त कर दिया. करीब 12 साल तक आरोपी कानून की नजरों से बचता रहा और सामान्य जीवन जीता रहा.
मामले में नया मोड़ तब आया जब नवंबर 2025 में वादी राजकुमार वर्मा ने आरोपी को गांधी नगर क्षेत्र में स्कूटी चलाते हुए देखा. उन्होंने आरोपी की फोटो खींची और स्कूटी नंबर के आधार पर आरटीओ कार्यालय से जानकारी जुटाई.
जांच में सामने आया कि आरोपी ने वर्ष 2016 में अपने नाम से नई स्कूटी भी पंजीकृत करवाई थी और बैंक खातों में मोबाइल बैंकिंग का भी इस्तेमाल कर रहा था. इसके बाद वादी ने कोर्ट में सबूतों के साथ प्रार्थना पत्र दाखिल किया.
कोर्ट के आदेश पर थाना न्यू आगरा पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. जांच के दौरान आरोपी अपने घर पर जीवित पाया गया. पुलिस ने मौके पर आरोपी और उसके बेटे की फोटो भी ली, जिसे कोर्ट में साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया.
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आरोपी के बेटे ने स्वीकार किया कि उसके पिता जीवित हैं और उम्र अधिक होने के कारण अधिकतर घर पर ही रहते हैं, जबकि कभी-कभी स्कूटी/स्कूटर से बाहर निकलते हैं.
पुलिस ने पूरी रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी है. अब आरोपी द्वारा फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर न्याय व्यवस्था को गुमराह करने का मामला उजागर हो चुका है.
बताया जा रहा है कि आरोपी ने वर्ष 2013 में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कोर्ट से अपने खिलाफ चल रही कार्रवाई रुकवा दी थी. अब पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है.
फिलहाल कोर्ट ने पुलिस से विस्तृत रिपोर्ट तलब कर ली है और पूरे प्रकरण की दोबारा समीक्षा की जा रही है. माना जा रहा है कि आरोपी पर अब धोखाधड़ी, कूटरचना और न्याय में बाधा डालने जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई हो सकती है.
अरविंद शर्मा