लखनऊ: CSIR स्टार्टअप कॉन्क्लेव में भारतीय हर्बल दवाओं ने लूटी वाहवाही, डायबिटीज रिवर्सल में हैं कारगर

लखनऊ में हुए CSIR स्टार्टअप कॉन्क्लेव में भारतीय हर्बल दवाओं ने ध्यान खींचा. सीएसआईआर की तीन प्रयोगशालाओं ने अब तक 13 दवाएं विकसित की हैं, जिनमें डायबिटीज की BGR-34 सबसे चर्चित रही. यह दवा ब्लड शुगर नियंत्रित करने के साथ डायबिटीज रिवर्सल में भी कारगर मानी जा रही है. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इसे ‘प्रयोगशाला से जनमानस तक’ का उदाहरण बताया और वैश्विक बाजार में विस्तार पर जोर दिया.

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया (Photo:pib) केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया (Photo:pib)

संजय शर्मा

  • नई दिल्ली,
  • 18 सितंबर 2025,
  • अपडेटेड 5:45 PM IST

लखनऊ में आयोजित CSIR स्टार्टअप कॉन्क्लेव में भारतीय हर्बल रिसर्च और आधुनिक विज्ञान के मेल से तैयार की गई दवाओं ने सभी का ध्यान खींचा. इस दौरान बताया गया कि कैसे प्रयोगशालाओं में विकसित तकनीक स्टार्टअप और उद्योग जगत के सहयोग से सीधे मरीजों तक पहुंच रही हैं. 

सीएसआईआर की तीन प्रमुख प्रयोगशालाओं- NBRI, सीमैप और CDRI ने अब तक 13 हर्बल दवाएं विकसित की हैं. इनमें डायबिटीज की दवा BGR-34, ब्लड कैंसर के लिए अर्जुन की छाल से बनी पैक्लिटैक्सेल और लीवर संबंधी बीमारी के इलाज के लिए पिक्रोलिव प्रमुख हैं. 

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सबसे ज्यादा चर्चा बीजीआर-34 की रही. इसे लखनऊ स्थित राष्ट्रीय वनस्पति विज्ञान संस्थान (एनबीआरआई) और सीमैप ने 6 प्रमुख जड़ी-बूटियों दारुहरिद्रा, गिलोय, विजयसार, गुड़मार, मंजिष्ठा और मेथी से विकसित किया है. ये दवा न केवल ब्लड शुगर नियंत्रित करने में मदद करती है, बल्कि लंबे समय में डायबिटीज रिवर्सल की दिशा में भी कारगर मानी जा रही है.

एमिल फार्मास्युटिकल्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. संचित शर्मा ने कहा कि दुनिया अब केवल डायबिटीज कंट्रोल नहीं, बल्कि डायबिटीज रिवर्सल पर जोर दे रही है. बीजीआर-34 जैसे भारतीय फार्मूले आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का मेल है. और यही भविष्य में डायबिटीज-मुक्त समाज का आधार बन सकते हैं.

उद्घाटन सत्र में केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि यह ‘प्रयोगशाला से जनमानस तक’ की अवधारणा का बेहतरीन उदाहरण है. उन्होंने स्टार्टअप को प्रोत्साहित किया कि वे हर्बल दवाओं को अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी प्रतिस्पर्धी बनाएं. केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने प्रदर्शनी का निरीक्षण किया और वैज्ञानिकों को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.

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ये आयोजन ऐसे समय में हुआ है, जब दुनियाभर में प्राकृतिक और हर्बल उपचारों की मांग बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास इस क्षेत्र में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित फार्मूलों के जरिए विश्व बाजार में नेतृत्व करने का बड़ा अवसर है. डॉ. संचित शर्मा ने कहा कि यह केवल दवा नहीं, बल्कि विज्ञान और परंपरा का ऐसा मॉडल है, जो आने वाले वर्षों में वैश्विक हेल्थकेयर एजेंडा तय कर सकता है.

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