मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फिल्म निर्माताओं से ऐसा कंटेंट बनाने का आह्वान किया जो समाज को प्रेरित करे. वाराणसी में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित एक सांस्कृतिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने नकारात्मक किरदारों का महिमामंडन करने के प्रति आगाह भी किया.
चक्रवर्ती सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित एक भव्य नाट्य प्रस्तुति में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "एक समय था जब नेक किरदारों को खलनायक के रूप में दिखाया जाता था और खलनायकों को फिल्मों के जरिए नायक के रूप में पेश किया जाता था. इसका क्या नतीजा हुआ? पीढ़ियां बिगड़ रही थीं. लोग अन्याय, उत्पीड़न और शोषण के खिलाफ अपनी आवाज खो रहे थे, क्योंकि युवा पीढ़ी के सामने ऐसे आदर्श पेश नहीं किए जा रहे थे."
आदित्यनाथ ने सामाजिक मूल्यों को गढ़ने में सिनेमा की ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा, "मैं फिल्म निर्देशकों और निर्माताओं से आग्रह करता हूं कि वे ऐसी फिल्में बनाएं जो मौजूदा पीढ़ी को प्रेरित कर सकें.
अगर आप किसी डाकू को नायक के रूप में पेश करते हैं, तो युवा उस डाकू को ही अपना आदर्श मानने लगेंगे. याद रखें, कभी भी किसी डाकू को हीरो के रूप में न दिखाएं." देखें VIDEO:-
उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा ने ऐतिहासिक रूप से तब सकारात्मक भूमिका निभाई है, जब उसने देश के आदर्शों को दर्शाया है. उन्होंने आगे कहा, "मौजूदा पीढ़ी के सामने जो कुछ भी पेश किया जाएगा, वह उन्हें उसी तरह से गढ़ेगा."
इस कार्यक्रम में आदित्यनाथ के साथ मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी मौजूद थे. CM मोहन यादव ने भी सभा को संबोधित किया और विक्रमादित्य की विरासत तथा राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि हम दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं.
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