नोएडा: इंजीनियर युवराज मेहता मौत मामले में एक्शन, बिल्डर अभय गिरफ्तार

ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार किया है. नॉलेज पार्क थाना पुलिस के अनुसार जांच में उसकी भूमिका सामने आई है. प्राधिकरण की बैठक के बाद एसआईटी ने जांच तेज कर दी है और अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई संभव है. रेस्क्यू में देरी, सुरक्षा चूक और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

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लाल घेरे में गिरफ्तार बिल्डर अभय. Photo ITG लाल घेरे में गिरफ्तार बिल्डर अभय. Photo ITG

अरविंद ओझा / अरुण त्यागी

  • नोएडा,
  • 20 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:35 PM IST

ग्रेटर नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है. जानकारी के अनुसार, नॉलेज पार्क थाना पुलिस ने जांच के बाद अभय कुमार को गिरफ्तार किया है. पुलिस का कहना है कि इंजीनियर की मौत के मामले में उनकी भूमिका सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई है.

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अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई 
बता दें कि प्राधिकरण में हुई अहम बैठक के बाद एसआईटी ने जांच को तेज कर दिया है. बैठक खत्म होते ही एसआईटी की टीम मौके के लिए रवाना हो गई. एडीजी भानु भास्कर ने बताया कि जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की जा चुकी है और अब मृतक के परिजनों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे.

उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों को सामने लाने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी. फिलहाल टीम स्थल का निरीक्षण कर रही है और जांच में अन्य जिम्मेदार अधिकारियों पर भी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है. एसआईटी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि मृतक को दो घंटे तक मदद क्यों नहीं मिल सकी.

नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की डूबने से हुई मौत का मामला दिन-ब-दिन तूल पकड़ता जा रहा है. हादसे के बाद नोएडा अथॉरिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे थे. परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर मौके पर सुरक्षा के सही इंतज़ाम होते, तो इस जानलेवा घटना को रोका जा सकता था.

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चार दिन बाद भी कार को बाहर नहीं निकाला जा सका
हादसे के चार दिन बाद भी प्रशासन वाहन को बाहर नहीं निकाल पाया है. यह दुर्घटना रात करीब 11:45 बजे हुई थी. इसके बाद युवराज करीब दो घंटे तक मदद के लिए आवाज़ लगाता रहा. सूचना मिलने पर रात 12:06 बजे फायर ब्रिगेड को कॉल की गई और 12:25 बजे तीन दमकल वाहन घटनास्थल पर पहुंचे. पूरी रात चले रेस्क्यू के दौरान तड़के 3:30 से 4:00 बजे के बीच एसडीआरएफ की टीम पहुंची, लेकिन कोई सफलता नहीं मिल सकी.

दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा युवराज
हादसे के बाद युवराज डूबती कार में फंसा रहा और करीब दो घंटे तक मदद के लिए चीखता रहा. जब सरकारी तंत्र की ओर से कोई गोताखोर पानी में नहीं उतरा, तब एक स्थानीय व्यक्ति ने साहस दिखाया. उसने अपनी कमर में रस्सी बांधी और करीब 50 मीटर तक पानी के भीतर जाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और युवराज का पता नहीं चल सका. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि मौके पर पुलिस और फायर ब्रिगेड मौजूद थीं, लेकिन हालात के अनुरूप प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई, जिससे सिस्टम की सुस्ती उजागर हुई.

रेस्क्यू ऑपरेशन की धीमी रफ्तार
हादसे के बाद घटनास्थल पर सब-इंस्पेक्टर शिव प्रताप और थाना प्रभारी भी मौजूद थे. फायर विभाग ने तुरंत गोताखोरों और एसडीआरएफ को बुलाने की मांग की थी, लेकिन एसडीआरएफ की टीम तड़के करीब 4 बजे पहुंच सकी. सुबह 6 बजे तक चला शुरुआती रेस्क्यू अभियान बेनतीजा रहा और युवराज की जान नहीं बचाई जा सकी.

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डीएम की मौजूदगी न होने पर उठे सवाल
आपदा प्रबंधन की जिम्मेदारी जिले के डीएम के पास होती है, लेकिन नोएडा की डीएम मेधा रूपम चार दिन बीत जाने के बावजूद घटनास्थल पर नहीं पहुंचीं. स्थानीय लोगों का आरोप है कि जहां डीएम को मौके पर रहकर रेस्क्यू की कमान संभालनी चाहिए थी, वहां केवल एक एसडीएम औपचारिक दौरे के लिए पहुंचे. इसी लापरवाही के चलते चार दिन बाद भी कार पानी में ही फंसी हुई है.

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