जुमे के दिन कैसा रहा बरेली के मोहम्मदगंज गांव का माहौल? हिंदुओं ने किया था पलायन का ऐलान

बरेली के मोहम्मदगंज में निजी घर में नमाज रोकने पर हाईकोर्ट ने डीएम-एसएसपी को अवमानना नोटिस जारी किया है. कोर्ट के अनुसार निजी स्थान पर प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं. फिलहाल गांव में शांति है, घरों पर लिखे 'बिकाऊ' शब्द मिटाए जा रहे हैं और पुलिस तैनात है.

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बरेली जिले का मोहम्मदगंज गांव (Photo- Screengrab) बरेली जिले का मोहम्मदगंज गांव (Photo- Screengrab)

aajtak.in

  • बरेली ,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 4:51 PM IST

यूपी के बरेली जिले के मोहम्मदगंज गांव में शुक्रवार को माहौल सामान्य रहा. जुमे के दिन को देखते हुए पुलिस-प्रशासन पहले से अलर्ट था. बिशारतगंज थाना समेत आसपास के थानों की फोर्स भी चौकन्नी रही. कहीं से कोई अप्रिय घटना की खबर सामने नहीं आई. फिलहाल, शांति-व्यवस्था कायम है. शरारती तत्वों पर निगरानी की जा रही है. वहीं, जिन हिंदुओं के मकानों पर 'बिकाऊ' शब्द लिखा था, उसको मिटाया जा रहा है. 

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आपको बता दें कि जिले के मोहम्मदगंज गांव स्थित एक मकान में बिना अनुमति के सामूहिक नमाज पढ़ी गई थी. वीडियो सामने आने के बाद हिंदू पक्ष भड़क उठा. विरोध के बाद हिंदू समुदाय के लोगों द्वारा गांव से पलायन करने की धमकी दी गई. इतना ही 'मकान बिकाऊ है' के पोस्टर घर के बाहर लगा दिए गए. इसकी सूचना मिलते ही गांव में पुलिस तैनात कर दी गई. नमाज रोक दी गई और इलाके में तनाव बढ़ गया. 

हालांकि, मुस्लिम पक्ष कोर्ट गया जहां से उसे राहत मिल गई. इसके बाद अब इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के डीएम और एसएसपी अनुराग आर्य को अवमानना का नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है. 

बताया जा रहा है कि गांव में किसी भी समुदाय का कोई धार्मिक स्थल नहीं है. सालों पहले करार हुआ था कोई भी मस्जिद या मंदिर का निर्माण नहीं कराया जाएगा. बीते दिनों हिंदू पक्ष  आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मकान बनाने के नाम पर छह पिलर का ढांचा खड़ा किया और वहां सामूहिक नमाज शुरू कर दी. 

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ग्रामीणों ने इस 'नई परंपरा' का विरोध करते हुए पुलिस से शिकायत की, जिसके बाद नमाज बंद कराई गई. वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे मदरसा या मस्जिद नहीं, बल्कि पशुओं के चारे और रहने के लिए घर बना रहे हैं. उधर, एसडीएम ने स्पष्ट किया है कि गांव में पलायन जैसी कोई स्थिति नहीं है और मामला अब कोर्ट में विचाराधीन है.

दरअसल, मोहम्मदगंज गांव में 16 जनवरी 2026 को रेशमा खान के निजी घर में कुछ लोग सामूहिक नमाज पढ़ रहे थे, जिसे हिंदू परिवारों की शिकायत के बाद पुलिस ने रुकवा दिया था. जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने इस पर नाराजगी जताते हुए 12 फरवरी को अवमानना की कार्यवाही शुरू की. क्योंकि, निजी परिसरों में प्रार्थना के लिए सरकारी अनुमति की जरूरत नहीं है.

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