UP: बहुचर्चित पोर्नोग्राफी मामले में JE दोषी करार, कोर्ट ने पति-पत्नी को सुनाई फांसी की सजा

उत्तर प्रदेश के बांदा में बहुचर्चित पोर्नोग्राफी मामले में अदालत ने सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है. CBI जांच में बच्चों का यौन शोषण कर अश्लील वीडियो विदेशों में बेचने के सबूत मिले थे. अदालत ने सरकार को पीड़ित बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया है.

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बांदा पोर्नोग्राफी केस में बड़ा फैसला.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG) बांदा पोर्नोग्राफी केस में बड़ा फैसला.(Photo: Siddhartha Gupta/ITG)

सिद्धार्थ गुप्ता

  • बांदा,
  • 20 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:51 PM IST

उत्तर प्रदेश के बांदा की एक अदालत ने बहुचर्चित पोर्नोग्राफी मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सिंचाई विभाग के जेई रामभवन और उसकी पत्नी को दोषी करार दिया है. अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई है. आरोपियों पर बच्चों के साथ गंदी हरकत करने, उनकी अश्लील वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने और इससे लाखों रुपये कमाने का आरोप था. 

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अदालत ने मामले में प्रस्तुत तमाम साक्ष्यों और गवाहों को ध्यान में रखते हुए यह कठोर सजा सुनाई है. अदालत ने अपने फैसले में सरकार को निर्देश दिया है कि पीड़ित बच्चों के परिवारों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. कोर्ट ने इसे अत्यंत गंभीर और जघन्य अपराध मानते हुए स्पष्ट किया कि आरोपियों ने मासूम बच्चों के साथ अमानवीय कृत्य किया, जो समाज और कानून दोनों के लिए अस्वीकार्य है.

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CBI जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य

मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने की थी. जांच के दौरान यह सामने आया कि आरोपी जेई रामभवन और उसकी पत्नी बच्चों के साथ पोर्नोग्राफी से जुड़े अपराध में शामिल थे. गिरफ्तारी के दौरान उनके घर से कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए, जिनमें पोर्नोग्राफी से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले. इन उपकरणों से यह भी संकेत मिला कि अश्लील वीडियो विदेशों में भेजे और बेचे जा रहे थे.

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CBI ने वर्ष 2020 में आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और इसके बाद विस्तृत जांच शुरू की. जांच के बाद एजेंसी ने अदालत में ठोस सबूत पेश किए, जिसके आधार पर अदालत ने दोनों को दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई.

इंटरपोल इनपुट से खुला मामला, 34 बच्चों के वीडियो बरामद

सरकारी वकील कमल सिंह गौतम के अनुसार, मामला अक्टूबर 2020 में सामने आया था. CBI को इंटरपोल के माध्यम से सूचना मिली थी कि बच्चों का यौन शोषण कर उनके वीडियो इंटरनेट पर अपलोड किए जा रहे हैं. जांच के दौरान एक पेन ड्राइव से 34 बच्चों के अश्लील वीडियो और सैकड़ों फोटो बरामद हुए थे, जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट हुई.

CBI ने फरवरी 2021 में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की और अदालत में 74 गवाह पेश किए. सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने 160 पेज के फैसले में दोनों आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई. अदालत ने आदेश दिया कि आरोपियों को तब तक फांसी पर लटकाया जाए जब तक उनकी मृत्यु न हो जाए, साथ ही सरकार को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने का निर्देश भी दिया.

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