रामनगरी अयोध्या मकर संक्रांति के अवसर पर श्रद्धा और भक्ति के रंग में पूरी तरह रंगी नजर आई. भोर होते ही हजारों श्रद्धालुओं ने सरयू घाट पर पहुंचकर पवित्र स्नान किया और पूजन किया. स्नान के बाद श्रद्धालु सीधे हनुमानगढ़ी पहुंचे, जहां बजरंगबली के भव्य दर्शन किए. इसके बाद श्रद्धालु श्रीराम जन्मभूमि पहुंचे और रामलला के दर्शन-पूजन के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति पर सरयू में स्नान करना, ध्यान करना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है. इसी आस्था के चलते सुबह-सुबह से ही में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा. घाट और मंदिरों से जय श्रीराम के उद्घोष लगातार गूंजते रहे और पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा.
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श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहे. सुरक्षा व्यवस्था के लिए जगह-जगह बैरिकेडिंग लगाई गई, यातायात सुचारू रूप से संचालित किया गया और प्रमुख मार्गों पर पुलिस और आरक्षक तैनात किए गए. प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में दर्शन और स्नान की व्यवस्था बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से संचालित होती रही.
इस पर्व पर अयोध्या में आस्था, अनुशासन और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम नजर आया. श्रद्धालुओं ने अपनी मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिए सरयू में स्नान किया, हनुमानगढ़ी में बजरंगबली के दर्शन किए और रामलला के चरणों में अपने कृतज्ञता भरे अर्पण किए. मकर संक्रांति के मौके पर धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का यह नजारा हर साल की भांति इस बार भी शहर की विशेष पहचान बना.
रामलला का विशेष श्रृंगार और भव्य भोग-प्रसाद
श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिरों के पट सुबह-सवेरे ही खोल दिए गए. मकर संक्रांति पर श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में विराजमान रामलला का विशेष श्रृंगार और भव्य भोग-प्रसाद का आयोजन किया गया. इस अवसर पर दही, पापड़, घी, अचार के साथ तिलकुट का विशेष भोग अर्पित किया गया, जिसे बाद में प्रसाद स्वरूप भक्तों में वितरित किया गया.
रामलला का दिव्य श्रृंगार और प्रसाद पाकर श्रद्धालु भाव-विभोर नजर आए. राम मंदिर ट्रस्ट के विशेष आमंत्रित सदस्य एवं व्यवस्था प्रभारी गोपाल जी राव ने बताया कि मकर संक्रांति पर रामलला के साथ-साथ बालक राम और राम दरबार में भी विशेष पूजा-अर्चना हुई. भगवान को पतंग अर्पित कर पर्व की परंपराओं को साकार किया गया, जिससे उत्सव की रौनक और बढ़ गई.
मयंक शुक्ला