बहू बेगम मकबरा परिसर में दिखा ऑस्ट्रेलियन 'इमू'... उड़ नहीं सकता ये दुर्लभ पक्षी, फिर कैसे पहुंचा अयोध्या?

रामनगरी अयोध्या में एक चौंकाने वाली कहानी सामने आई है. यहां ऑस्ट्रेलिया का दुर्लभ पक्षी 'इमू' बहू बेगम मकबरा परिसर में देखा गया. यह पक्षी उड़ान नहीं भर सकता. ऐसे में सवाल है कि इतनी लंबी दूरी तय कर आखिर यहां तक कैसे आ सकता है. हालांकि, वन विभाग अभी इस मामले में जांच कर रहा है.

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अयोध्या में स्थित बहू बेगम मकबरा परिसर में नजर आया इमू. (Photo: Screengrab) अयोध्या में स्थित बहू बेगम मकबरा परिसर में नजर आया इमू. (Photo: Screengrab)

मयंक शुक्ला

  • अयोध्या,
  • 18 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST

अयोध्या के ऐतिहासिक बहू बेगम मकबरा परिसर में अचानक एक ऐसा मेहमान नजर आया, जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया. यह मेहमान कोई आम पक्षी नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया का दुर्लभ पक्षी 'इमू' है. खास बात यह है कि ये पक्षी उड़ान नहीं भर सकता. ऐसे में सवाल है कि फिर ये अयोध्या पहुंचा कैसे?

जैसे ही लोगों को इसकी जानकारी मिली, उनमें देखने की उत्सुकता बढ़ गई. स्थानीय लोग और पर्यटक इस अनोखे पक्षी को देखने के लिए मकबरा परिसर की ओर पहुंचने लगे. किसी ने मोबाइल कैमरे में इसे कैद किया, तो कोई इसकी चाल और हाव-भाव को देखकर हैरानी जताता नजर आया. इस तरह का विदेशी पक्षी दिखना अनोखा अनुभव था.

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वन विभाग के अनुसार, बहू बेगम मकबरा परिसर में इमू का एक जोड़ा मौजूद है. अयोध्या के डीएफओ प्रखर गुप्ता ने बताया कि इमू मूल रूप से ऑस्ट्रेलिया का है और यह शुतुरमुर्ग की प्रजाति से जुड़ा है. हालांकि यह पक्षी उड़ नहीं सकता, लेकिन इसकी खासियत इसकी रफ्तार और अनोखा व्यवहार है, जो इसे दुनिया के सबसे दिलचस्प पक्षियों में शामिल करता है.

इमू को दुनिया के सबसे बड़े उड़ानहीन पक्षियों में गिना जाता है. इसकी लंबी गर्दन, मजबूत पैर और तेज दौड़ने की क्षमता इसे खास बनाती है. यह पक्षी 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से दौड़ सकता है और जरूरत पड़ने पर तैर भी सकता है. इसके अलावा, इसकी खानपान की आदतें भी अलग हैं- यह सर्वाहारी होता है और फल, बीज, घास, कीड़े-मकोड़े और छोटे जीवों तक को खा सकता है. इसकी उम्र भी कम नहीं होती, यह लगभग 25 से 30 साल तक जीवित रह सकता है.

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हालांकि इस पूरे मामले ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं. सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह विदेशी पक्षी अयोध्या के इस ऐतिहासिक परिसर तक कैसे पहुंचा? क्या इसे किसी ने पाला था और फिर यह यहां आ गया, या फिर यह किसी और जगह से भटककर यहां पहुंचा? यह फिलहाल साफ नहीं है.

वन विभाग का कहना है कि चूंकि इमू भारत का मूल पक्षी नहीं है, इसलिए यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजातियों की सूची में शामिल नहीं है. ऐसे विदेशी यानी एक्जॉटिक जीवों के लिए अलग नियम होते हैं, जिनके तहत उनकी देखभाल और सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है.

फिलहाल विभाग इस जोड़े पर नजर बनाए हुए है और यह देखा जा रहा है कि उन्हें किसी तरह का नुकसान न पहुंचे. लोग इस अनोखे ऑस्ट्रेलियन मेहमान को देखने के लिए भी पहुंच रहे हैं. यह भी जरूरी है कि इस पक्षी की सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित की जाए, ताकि यह अनोखा मेहमान सुरक्षित रह सके. स्थानीय लोग, पर्यटक और यहां तक कि सोशल मीडिया यूजर्स भी इस सवाल में उलझे हैं कि आखिर यह पक्षी यहां तक कैसे पहुंचा?

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