आज के समय में बड़े शहरों में ऊंची-ऊंची बिल्डिंग में रहना लोगों के लिए स्टेटस और लग्जरी की पहचान माना जाता है. चमकदार फ्लैट, लिफ्ट, सिक्योरिटी और आधुनिक सुविधाएं देखकर लगता है कि यहां जिंदगी बहुत आरामदायक होगी. लेकिन हाल ही में एक महिला के वीडियो ने इस सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस वीडियो में महिला ने बताया कि ऊंची इमारत में रहने का अनुभव बाहर से जितना आकर्षक लगता है, अंदर से उतना ही अकेलापन भरा हो सकता है.
जेल जैसा लगता है यहां रहना
इंस्टाग्राम पर अंजली चौधरी नाम की महिला ने एक वीडियो शेयर किया जिसमें उन्होंने अपने अनुभव के बारे में खुलकर बात की. उन्होंने कहा कि जब वह इस ऊंची इमारत में रहने आई थीं, तो उन्हें भी लगा था कि यह बहुत आरामदायक और शानदार होगा. चारों तरफ रोशनी, अच्छी बिल्डिंग और मॉडर्न सुविधाएं उन्हें काफी आकर्षित करती थीं. लेकिन समय के साथ उनका नजरिया बदल गया. उन्होंने बताया कि अब उन्हें यह जगह किसी “जेल” जैसी लगने लगी है, क्योंकि यहां लोग एक-दूसरे से बहुत कम बात करते हैं.
यहां कोई किसी से बात नहीं करता
महिला ने वीडियो में बताया कि वह अपने परिवार के साथ पिछले चार साल से इस इमारत में रह रही हैं, लेकिन आज भी उन्हें अपने पड़ोसियों के बारे में ज्यादा कुछ पता नहीं है. न तो उन्हें यह पता है कि कौन कब आता-जाता है और न ही कोई आपस में ज्यादा बातचीत करता है. उन्होंने कहा कि यहां हर कोई अपनी जिंदगी में इतना व्यस्त है कि किसी के पास बात करने का समय ही नहीं है. यही चीज उन्हें सबसे ज्यादा अकेलापन महसूस कराती है.
पुराने मोहल्लों की याद आई
अंजली ने यह भी कहा कि उन्हें पुराने समय के मोहल्लों की बहुत याद आती है, जहां पड़ोसी एक परिवार की तरह रहते थे. लोग एक-दूसरे के घर आते-जाते थे, साथ बैठकर चाय पीते थे और छोटी-छोटी खुशियों को शेयर करते थे. उन्होंने कहा कि अब उस तरह का अपनापन बहुत कम देखने को मिलता है. कभी-कभी उन्हें लगता है कि काश यहां भी कुछ ऐसे पड़ोसी होते जिनसे वह बातचीत कर पाती.
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और इसे लाखों बार देखा जा चुका है. इसके बाद लोगों ने इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी. कई लोगों ने महिला की बात से सहमति जताई और कहा कि ऊंची इमारतों में रहने पर अक्सर लोग अकेलापन महसूस करते हैं. कुछ यूजर्स ने लिखा कि पुराने मोहल्लों में जो अपनापन था, वह आज की हाई-राइज सोसाइटी में कम हो गया है. लोग एक-दूसरे के साथ जुड़ नहीं पाते, भले ही वे एक ही बिल्डिंग में रहते हो.
कुछ लोगों ने यह भी कहा कि आधुनिक फ्लैट्स में आराम तो बहुत मिलता है, लेकिन सामाजिक जुड़ाव कम हो गया है. पहले लोग बिना किसी झिझक के एक-दूसरे के घर चले जाते थे, लेकिन अब लिफ्ट में साथ खड़े होकर भी लोग अनजान बने रहते हैं. एक यूजर ने लिखा सैकड़ों फ्लैटों के बीच भी लोग अकेले महसूस करते हैं, यही आज की सच्चाई है.
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