US की करोड़ों की जॉब छोड़ भारत लौटा टेकी, बताया-इंडिया की लाइफ क्यों है सबसे बेहतर

एक भारतीय टेकी ने बताया कि अमेरिका में अपनी हाई-पेइंग माइक्रोसॉफ्ट नौकरी छोड़कर भारत लौटने से उनकी जिंदगी की क्वालिटी में बेहद बड़ा सुधार आया.

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चड्ढा ने अपने X पोस्ट में लिखा कि अमेरिका से भारत आने के बाद उनकी लाइफ कैसे बेहतर हो गई.(Photo:X/@ujjwalscript and pexel) चड्ढा ने अपने X पोस्ट में लिखा कि अमेरिका से भारत आने के बाद उनकी लाइफ कैसे बेहतर हो गई.(Photo:X/@ujjwalscript and pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 3:11 PM IST

अक्सर माना जाता है कि अमेरिका में हाई-पेइंग नौकरी मिल जाए तो जिंदगी सेट हो जाती है, लेकिन एक भारतीय टेकी की कहानी इसके बिल्कुल उलट है. उज्ज्वल चड्ढा ने बताया कि कैसे माइक्रोसॉफ्ट में अपनी 250,000 डॉलर सालाना की नौकरी छोड़कर अमेरिका से भारत लौटना उनके जीवन का सबसे बड़ा अपग्रेड साबित हुआ. चड्ढा ने अपने X पोस्ट में लिखा कि अमेरिका से भारत आने के बाद उनकी लाइफ कैसे बेहतर हो गई.

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उज्ज्वल चड्ढा ने लगभग तीन साल सीएटल में माइक्रोसॉफ्ट में डेवलपर के रूप में काम किया. उन्होंने बताया कि बाहर से यह सैलरी बहुत बड़ा दिखती है, लेकिन सीएटल जैसे महंगे शहर में यह बस 'कम्फर्टेबल लाइफ' देता है. उन्होंने कहा कि असली बदलाव तब आया जब उन्होंने जीवन के तीन पहलुओं-पर्चेजिंग पावर, परिवार और मानसिक शांति को समझा.

सबसे पहला बदलाव Purchasing Power Parity (PPP) का था. चड्ढा के मुताबिक, अमेरिका में ढाई लाख डॉलर की कमाई सिर्फ एक आरामदायक जीवन देती है, लेकिन भारत में यही पैसा पीढ़ियों तक चलने वाला धन होता है. वे दिल्ली में अपने परिवार के घर में रहते हैं, जिससे उनका किराया 80 फीसदी तक कम हो गया है. उनकी सेविंग 90 फीसदी तक पहुंच गई है और अब वे मेनू देखकर दाम सोचने की जरूरत भी नहीं महसूस करते.

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भारत लौटने का दूसरा बड़ा फायदा परिवार के साथ समय है. अमेरिका में न कोई अपनापन था, न परिवार. वे अकेलेपन, लंबे कम्यूट और फ्रोजन डिनर से परेशान थे. अब हर शाम वे अपने माता-पिता के साथ चाय पीते हैं. न ठंडी सर्दियों की झंझट, न दो घंटे की ड्राइविंग. उन्होंने बताया कि यहां उन्हें घर के कामों में मदद भी मिल जाती है.कुक और ड्राइवर मिलने से उनके पास खुद के लिए ज्यादा समय रहता है. चड्ढा कहते हैं कि वे घर के स्टाफ को अच्छा भुगतान भी करते हैं.

तीसरा और सबसे अहम बदलाव वीजा का तनाव खत्म होना है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में हर दिन वीजा का डर बना रहता था. रिमोट जॉब अपनाने के बाद यह चिंता खत्म हो गई है और अब वे पूरी फोकस के साथ अच्छे प्रोडक्ट बनाने और अपने आइडिया पर काम कर पाते हैं.

अंत में चड्ढा ने लिखा कि मैं अमेरिका छोड़कर रिटायर होने नहीं आया. मैं यहां अपनी जिंदगी जीने आया हूं.

लोगों ने क्या कहा

ज्यादातर लोगों का यही सवाल था कि क्या रिमोट वर्क में वही सैलरी मिलती है, जो यूएस में मिलती थी. वहीं किसी का कहना था कि माता-पिता के साथ चाय पीने वाला डिविडेंड ही असली मायने रखता है.हमारे पास अपने माता-पिता के साथ बिताने के लिए समय सीमित होता है.एक मिलियन डॉलर तो आप फिर से कमा सकते हैं,लेकिन उनके साथ बिताई गई एक मंगलवार की शाम दोबारा नहीं ला सकते.यही आपकी जिंदगी का सबसे बड़ा और सबसे ज्यादा रिटर्न देने वाला निवेश है.

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