'पॉकेट मनी' जैसी लगती है सैलरी, US से लौटी भारतीय टेकी का अनुभव वायरल

डॉलर की मोटी सैलरी छोड़कर जब अदिति द्विवेदी भारत लौटीं, तो उन्हें लगा कि यहां की कमाई 'पॉकेट मनी' जैसी है—लेकिन इसी बदलाव ने उनकी जिंदगी की प्राथमिकताएं बदल दीं. वीजा की टेंशन से दूर, अब वह वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा अहम मानती हैं.

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महिला बताती हैं कि भारत लौटने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं (Photo: Pexel) महिला बताती हैं कि भारत लौटने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं (Photo: Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 19 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:23 AM IST

अमेरिका में कई साल काम करने के बाद भारत लौटी एक भारतीय महिला का अनुभव इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. अदिति द्विवेदी ने अपने पोस्ट में बताया कि डॉलर में कमाई और रुपये में सैलरी मिलने के बीच कितना बड़ा फर्क महसूस होता है, और इस बदलाव ने उनकी सोच और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया.

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अदिति द्विवेदी ने अमेरिका में सात साल से अधिक समय तक कॉग्निजेंट में काम किया. इससे पहले उन्होंने ओहायो यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की थी. साल 2024 की शुरुआत में वह भारत लौटीं और अब दिल्ली-एनसीआर में रह रही हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड्स पर शेयर किए गए पोस्ट में उन्होंने बताया कि अमेरिका में वह लगातार काम करती थीं, क्योंकि वीजा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती थी. वहां काम का दबाव ज्यादा था और हर समय नौकरी सुरक्षित रखने का दबाव रहता था.

भारत लौटने के बाद उनकी प्राथमिकताएं बदल गई हैं. उन्होंने कहा कि अब वह वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा महत्व देती हैं, भले ही इसके साथ सैलरी कम हो. उनके मुताबिक, भारत में उनकी सैलरी अब “पॉकेट मनी” जैसी महसूस होती है, जो सिर्फ लाइफस्टाइल को सपोर्ट करती है, न कि इच्छाओं को पूरा करने का मुख्य जरिया है.

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अदिति ने यह भी बताया कि भारत में सही नौकरी ढूंढना आसान नहीं रहा. उन्होंने यहां आने के बाद कई कंपनियों को एक्सप्लोर किया, लेकिन अभी तक सही फिट मिलना चुनौतीपूर्ण रहा है. हालांकि, वह इस सफर को एंजॉय कर रही हैं और इसे सीखने वाला अनुभव मानती हैं.

देखें पोस्ट

 

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कुछ यूजर्स ने उनके फैसले की सराहना करते हुए कहा कि जिंदगी में संतुलन बनाना जरूरी है, वहीं कुछ ने भारत के वर्क कल्चर को चुनौतीपूर्ण बताते हुए अपने अनुभव साझा किए.

यह कहानी एक बड़े सवाल को सामने लाती है-क्या ज्यादा सैलरी ज्यादा जरूरी है या बेहतर जीवन संतुलन? इसका जवाब हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है, लेकिन अदिति द्विवेदी के अनुभव से इतना जरूर साफ है कि समय के साथ प्राथमिकताएं बदल जाती हैं.

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