इलेक्शन में खड़ी हुई जज, छोड़ी सुनवाई... कहा-‘दोनों काम साथ करना नामुमकिन’

अमेरिका की एक जज ने अपने कोर्ट के मामलों से खुद को अलग करने की बात कही, क्योंकि वह अपने चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं. इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई कि क्या चुनाव के कारण न्यायिक काम प्रभावित होना सही है.

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इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी दबाव के चलते न्यायिक कामकाज प्रभावित हो सकता है. (Photo: Pexels) इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी दबाव के चलते न्यायिक कामकाज प्रभावित हो सकता है. (Photo: Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 11 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 9:34 AM IST

अमेरिका से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने लोगों को हैरान कर दिया है. यहां एक जज ने कहा है कि वह अपने केस के लिए कोर्ट नहीं जा सकती, क्योंकि वह अपने चुनाव प्रचार में इतनी व्यस्त हैं और दोनों काम एक साथ करना उनके लिए मुमकिन नहीं है. यह मामला अमेरिका के पोर्टलैंड शहर का है, जहां मल्टीनोमा काउंटी की सर्किट जज एड्रियन ब्राउन ने अपने सहयोगियों से अनुरोध किया है कि वे कुछ समय के लिए उनके मामलों की सुनवाई संभाल लें. उन्होंने कहा कि वह इस समय अपने पुनर्निर्वाचन के कैंपेन में पूरी तरह व्यस्त हैं.

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सहयोगियो से केस संभालने का अनुरोध
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जज ब्राउन ने अपने साथ काम करने वाले जजों को माइक्रोसॉफ्ट टीम्स पर एक मैसेज भेजा. इस मैसेज में उन्होंने साफ कहा कि चुनाव से जुड़ी चुनौतियों के बीच कोर्ट के केस संभालना उनके लिए नामुमकिन है. उन्होंने अपने सहयोगियों से अनुरोध किया कि वे अगले एक महीने तक उनके हिस्से के घरेलू हिंसा से जुड़े छोटे मामलों की सुनवाई कर लें. जज ब्राउन ने अपने मैसेज में लिखा कि किसी भी जज से यह उम्मीद नहीं की जानी चाहिए कि वह एक साथ चुनाव की चुनौती और कोर्ट के मामलों को संभाल सके. उन्होंने कहा कि यह स्थिति बहुत मुश्किल है और वह नहीं चाहतीं कि कोई और जज भी ऐसी स्थिति से गुजरे.

इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई, जब एक वकील पीटर क्लिम ने उनके खिलाफ चुनाव लड़ने का फैसला किया. बताया जा रहा है कि क्लिम ने नामांकन की आखिरी तारीख से ठीक पहले चुनाव में एंट्री की, जिससे ब्राउन को तैयारी का ज्यादा समय नहीं मिल पाया. जज ब्राउन ने कहा कि उनके प्रतिद्वंदी ने उन्हें पहले से कोई जानकारी नहीं दी थी कि वह चुनाव लड़ने वाले हैं. ऐसे में उन्हें अचानक अपनी चुनावी टीम बनानी पड़ी और अभियान की तैयारी करनी पड़ी. उन्होंने बताया कि उन्होंने एक हफ्ते में 50 घंटे से ज्यादा काम किया, ताकि अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत कर सकें.

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ब्राउन ने यह भी कहा कि वह इस दौरान छुट्टी पर थीं, लेकिन यह छुट्टी आराम करने के लिए नहीं थी. उन्होंने अपना पूरा समय चुनाव की तैयारी में लगाया, ताकि वह मजबूत तरीके से चुनाव लड़ सकें. गौर करने वाली बात यह है कि जज एड्रियन ब्राउन ने साल 2020 में पहली बार यह चुनाव जीता था. इससे पहले वह ओरेगन में यूएस अटॉर्नी ऑफिस में काम कर चुकी हैं और नागरिक अधिकारों से जुड़े मामलों को संभाल चुकी हैं.

सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल
जब उनके इस फैसले पर सवाल उठे, तो उनकी कैंपेन प्रवक्ता कैथलीन स्टुअर्ट ने उनका बचाव किया. उन्होंने कहा कि ब्राउन ने कुछ भी गलत नहीं किया है. वह अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं और हमेशा कोर्ट में अपने कर्तव्यों को निभाने के लिए तैयार रहती हैं. स्टुअर्ट ने यह भी बताया कि ब्राउन अक्सर अपने सहयोगियों की मदद करती रही हैं और जरूरत पड़ने पर उनके केस भी संभालती हैं. इसलिए इस बार उन्होंने सहयोगियों से मदद मांगी है, जो एक सामान्य प्रक्रिया मानी जा सकती है. यह मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि आमतौर पर जजों से उम्मीद की जाती है कि वे हर हाल में अपने कोर्ट के काम को प्राथमिकता दें. लेकिन इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या चुनावी दबाव के चलते न्यायिक कामकाज प्रभावित हो सकता है. 

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