अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सेहत को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है. हाल ही में व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप कुछ देर के लिए आंखें बंद किए और सिर झुकाए नजर आए, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनके स्वास्थ्य और मानसिक सतर्कता को लेकर सवाल उठने लगे.
यह घटना 11 मई 2026 को 'Moms.gov' वेबसाइट लॉन्च इवेंट के दौरान हुई. वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं और कई सोशल मीडिया यूजर्स ने दावा किया कि ट्रंप कार्यक्रम के बीच झपकी लेते दिखाई दिए. हालांकि व्हाइट हाउस ने इसे सामान्य “ब्लिंकिंग” यानी पलक झपकना बताया और कहा कि इसे बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है.
लेकिन यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप की सार्वजनिक मौजूदगी को लेकर इस तरह की चर्चा हुई हो. 2025 और 2026 के दौरान कई बैठकों और कार्यक्रमों में भी वह आंखें बंद किए या थके हुए दिखाई दिए थे. इसी वजह से अब उनकी उम्र और कामकाजी क्षमता पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है.
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स्वास्थ्य से जुड़े पुराने मुद्दे भी चर्चा में
ट्रंप की सेहत को लेकर इससे पहले भी कई रिपोर्ट्स सामने आ चुकी हैं. जुलाई 2025 में व्हाइट हाउस ने बताया था कि उनके पैरों में सूजन और हाथों पर निशान “क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी” यानी नसों से जुड़ी समस्या की वजह से थे. हाथों पर पड़ने वाले निशानों को लगातार हैंडशेक और एस्पिरिन लेने से जुड़ा बताया गया था.
कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ब्लड क्लॉट की आशंका भी जताई गई थी, हालांकि व्हाइट हाउस ने डीप वेन थ्रोम्बोसिस जैसी गंभीर स्थिति से इनकार किया था.
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फैसले लेने की क्षमता पर सवाल
ट्रंप इस समय 79 साल के हैं और आलोचकों का कहना है कि बढ़ती उम्र उनके व्यवहार और सार्वजनिक भाषणों में दिखाई देने लगी है. विपक्षी नेताओं और कुछ विशेषज्ञों ने दावा किया कि ट्रंप कई बार भाषणों में विषय से भटकते या शब्द भूलते नजर आए हैं.
कुछ सर्वे में यह भी सामने आया कि स्वतंत्र मतदाताओं और कुछ रिपब्लिकन समर्थकों के बीच उनकी 'मेंटल शार्पनेस' को लेकर चिंता बढ़ी है. आलोचकों का सवाल है कि अगर राष्ट्रपति महत्वपूर्ण बैठकों के दौरान थके हुए नजर आते हैं, तो राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े फैसलों पर इसका असर पड़ सकता है.
ट्रंप और व्हाइट हाउस ने क्या कहा?
व्हाइट हाउस लगातार यह कहता रहा है कि ट्रंप पूरी तरह स्वस्थ हैं. ट्रंप खुद भी कई बार दावा कर चुके हैं कि वह पूरी तरह से फीट हैं और कॉग्निटिव टेस्ट पास कर चुके हैं. उनका कहना है कि वह कम नींद लेकर भी पूरी ऊर्जा के साथ काम करते हैं. कॉग्निटिव टेस्ट ऐसा टेस्ट होता है, जिससे किसी व्यक्ति की मानसिक क्षमता और दिमागी कार्यप्रणाली को जांचा जाता है. इसमें यह देखा जाता है कि व्यक्ति की याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता, ध्यान, भाषा और फैसले लेने की शक्ति कितनी सही तरीके से काम कर रही.
कुछ डॉक्टरों ने माना कि उम्र, व्यस्त दिनचर्या या नींद से जुड़ी समस्याएं इसकी वजह हो सकती हैं, लेकिन किसी भी विशेषज्ञ ने आधिकारिक तौर पर संज्ञानात्मक गिरावट की पुष्टि नहीं की है.
अब यह मामला सिर्फ स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अमेरिकी राजनीति का हिस्सा बन चुका है. 2026 के चुनावी माहौल में 'Sleepy Trump' और 'Sharp Trump' जैसी बहसें सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर लगातार तेज हो रही हैं।
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