JEE टॉपर्स का खुलासा, सफलता के लिए छोड़ा स्मार्टफोन; अपनाया कीपैड फोन

सोशल मीडिया से दूरी… और स्मार्टफोन से दूरी… क्या आज के दौर में यह सच में संभव है? यही सवाल सोशल मीडिया पर चर्चा में है. एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ है, जिसमें JEE टॉपर्स दावा कर रहे हैं कि उनकी जिंदगी में न स्मार्टफोन है, न सोशल मीडिया.

Advertisement
इस वीडियो को AIIMS के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दत्ता ने भी शेयर किया (Photo:X/@bs_rupawat) इस वीडियो को AIIMS के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दत्ता ने भी शेयर किया (Photo:X/@bs_rupawat)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:43 AM IST

कहते हैं, कामयाबी हमेशा कुर्बानी मांगती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसे साबित करता है. इस वीडियो में JEE टॉपर्स बेसिक कीपैड फोन इस्तेमाल करते दिखे. वे कहते हैं कि वे सोशल मीडिया से दूर रहते हैं. उनके मुताबिक यह पढ़ाई को भटकाता है. वीडियो के कैप्शन में भी लिखा था—लक्ष्य हासिल करने के लिए कम से कम एक महीना ऐसे ज़रूर बिताइए.

Advertisement

आज के समय में छोटे बच्चे भी स्मार्टफोन और रील्स में खो जाते हैं. लेकिन यह वीडियो लोगों के लिए चौंकाने वाला था. कई लोगों को यकीन नहीं हुआ कि छात्र इतनी सख्ती से स्मार्टफोन से दूर रह सकते हैं.

टॉपर्स की जेब से निकला ‘iPhone 19’

वीडियो में एक व्यक्ति छात्रों से पूछता है कि वे किस तरह का फोन इस्तेमाल करते थे. छात्र अपने फोन जेब से निकालते हैं. लगभग सभी के पास कीपैड फोन था. इसका मतलब वे तकनीक से दूरी बनाकर पढ़ाई पर फोकस कर रहे थे.सबसे मजेदार पल तब आया. एक छात्र ने मजाक में अपने कीपैड फोन को ‘iPhone 19’ कहा. यह देखकर लोग हंस पड़े.

डॉ. दत्ता ने बताई दूरी की वजह

इस वीडियो को AIIMS के रेडियोलॉजिस्ट डॉ. दत्ता ने भी शेयर किया. उन्होंने कहा कि बड़े लक्ष्य के लिए सोशल मीडिया से दूरी ज़रूरी है. उनका मानना है कि जब ध्यान चाहिए, तब अस्थायी दूरी बहुत फायदा देती है. यह हमेशा मदद करती है.

Advertisement

डॉक्टर ने सुनाया अपना अनुभव

डॉ. दत्ता ने जनवरी 2020 की अपनी निजी घटना बताई. उस समय उनकी गर्लफ्रेंड पुडुचेरी में थीं. एक रात उन्होंने नशे की हालत में फोन कर ब्रेकअप कर लिया. उस वक्त वे दिल्ली में AIIMS PG की तैयारी कर रहे थे. दिसंबर के NEET PG में उन्हें लगभग 13,000 रैंक मिली थी. वे अपनी पढ़ाई को और गंभीर बनाना चाहते थे.

इस घटना के बाद उन्होंने तय किया कि उन्हें हर भटकाव हटाना होगा. उन्होंने अपनी एक्स को ब्लॉक किया. WhatsApp और Chrome अनइंस्टॉल कर दिए. फिर पूरे पांच महीने सोशल मीडिया से दूर रहे. उन्होंने कहा कि यही कदम उनके फोकस के लिए सबसे प्रभावी था.

'स्क्रॉलिंग भी कमजोर करती है दिमाग'

एक अन्य यूजर ने भी सोशल मीडिया के खतरे बताए. उन्होंने लिखा कि पासिव स्क्रॉलिंग दिमाग की क्षमता कम करती है. छोटे-छोटे रील्स फोकस घटा देते हैं.अक्सर युवा खुद से कहते हैं-बस पांच मिनट. पर फिर वे आधा घंटा ऑनलाइन बिता देते हैं. यही आदत बड़ों में भी होती है. धीरे-धीरे यह एक वैश्विक समस्या बन चुकी है. यह लोगों की एकाग्रता और दिनचर्या दोनों को नुकसान पहुंचा रही है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement