ब्रिटेन में आने वाले समय में 'ब्लड रेन'हो सकती है! यह शब्द सुनकर ही डरावना लगता है कि यह काफी खतरनाक होगा. एक विशेषज्ञ के मुताबिक, जल्द ही ऐसी बारिश से ब्रिटेन सराबोर हो जाएगा. उन्होंने बताया कि यह ब्लड रेन क्या है और क्यों होता है? दरअसल, यह घटना प्रदूषण और क्लाइमेट चेंज से जुड़ी हुई है. इसलिए लोगों को इससे डरना चाहिए.
जलवायु परिवर्तन के चलते ब्रिटेन में नारंगी आसमान और 'ब्लड रेन' जैसी घटनाएं आने वाले समय में आम हो सकती हैं. 'ब्लड रेन' तब होती है जब सहारा रेगिस्तान की धूल वायुमंडल में फैल जाती है और फिर अफ्रीका से हजारों मील दूर बारिश के रूप में गिरती है, जिससे हर चीज लाल-नारंगी रंग की परत से ढक जाती है.
क्या होता है 'ब्लड रेन'
मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के वर्षों में, स्पेन, फ्रांस और ब्रिटेन के निवासियों को एक विचित्र दृश्य देखने को मिला है. गहरे नारंगी रंग के सूर्योदय और पीले धुंध से ढका आसमान. इस धुंध भरे आसमान से अक्सर ब्लड रेन होती है, जो लोहे में लगे जंग के रंग की वर्षा होती है और कारों और खिड़कियों पर बारीक कण छोड़ और लाल रंग के दाग छोड़ जाती है.
लुंड विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर एडवांस्ड मिडिल ईस्टर्न स्टडीज के वरिष्ठ व्याख्याता हुसैन हाशमी ने कहा कि जैसे-जैसे जलवायु परिवर्तन दुनिया के सबसे बड़े रेगिस्तान को बदल रहा है, यूरोप खुद को तेजी से बदलते पर्यावरणीय संकट की चपेट में आता हुआ पा रहा है.
उन्होंने कहा कि अधिकांश धूल अटलांटिक महासागर के पार चली जाती है, लेकिन इसकी बढ़ती मात्रा यूरोप में उत्तर की ओर फैलती है - विशेष रूप से फरवरी और जून के बीच. हुसैन ने कहा कि एक ओर, बढ़ते तापमान से मिट्टी सूख जाती है और मरुस्थलीकरण की प्रक्रिया तेज हो जाती है, जिससे हवा के लिए महीन कणों को उड़ाना बहुत आसान हो जाता है.
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अत्यधिक गर्मी बढ़ने की स्थिति में, सदी के अंत तक वायुमंडल में उठने वाली सहारा रेगिस्तान की धूल की मात्रा 40% से 60% तक बढ़ सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि सहारा रेगिस्तान की धूल से हवा की गुणवत्ता में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे अदृश्य कणों का स्तर स्वास्थ्य संबंधी दिशानिर्देशों से ऊपर जा सकता है.
हुसैन ने 'द कन्वर्सेशन ' को बताया कि पीएम10 के नाम से जाने जाने वाले ये महीन कण फेफड़ों में गहराई तक प्रवेश कर सकते हैं, जिससे अस्थमा और हृदय संबंधी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. स्पेन और इटली में किए गए मॉडलिंग अध्ययनों से पता चलता है कि पीएम10 प्रदूषण से संबंधित मौतों में से 44% तक मौतें सहारा रेगिस्तान की धूल के कारण हो सकती हैं.
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