इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें एक महिला विदेशी शख्स से लिपट कर रोती दिखाई दे रही है. वीडियो में दावा किया गया है कि वह महिला पाकिस्तान की एक बंधुआ मजदूर है और 130 साल से उसका परिवार पीढ़ी दर पीढ़ी एक ईंट भट्ठे पर मजदूरी कर रहा था. अब जाकर एक अंग्रेज ने उसे इस गुलामी की जिंदगी से मुक्ति दिलाई है. जिस वजह से वह भावुक होकर उस शख्स से लिपटकर रोती दिखाई दी.
दुनिया के दूसरे देशों के लिए बंधुआ मजदूरी हैरान करने वाली प्रथा भले ही हो सकती है. लेकिन, पाकिस्तान के लिए यह आम है. इस देश में हजारों ऐसे ईंट भट्ठे हैं, जहां गलत तरीके से हजारों परिवार को फंसाकर दशकों से पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है.
इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो ने अब पूरी दुनिया को पाकिस्तान की इस क्रूर सच्चाई से वाकिफ कराया है. इंस्टाग्राम पर @aaronhutchings77 नाम के हैंडल से एक वीडियो शेयर किया गया है. इस वीडियो के कैप्शन में लिखा है - दिन 5 (दूसरा परिवार) - चेतावनी (रुला देने वाला पल) - जब हम पहली बार उनके पास गए, तो यही हुआ. मुझे लगता है कि उन्हें पता था कि उन्हें आजाद किया जाने वाला है.
'गुलामी का अंत करो' कैंपेन से जुड़े आरोन हचिंग्स पाकिस्तान में ईंट भट्ठियों और अन्य जगह पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी में फंसे लोगों को छुड़ाने का काम कर रहे हैं. सोशल मीडिया पर आरोन ने काफी सारे वीडियो शेयर किए हैं. जिनमें उन्होंने दावा किया है कि ईंट भट्ठा मालिकों को उन मजदूरों के बदले उन्होंने कर्ज का पैसा वापस किया. इसके बाद बंधुआ मजदूर गुलामी की जंजीर से आजाद हो गए.
यह अभियान से जुड़े एक्टिविस्ट पाकिस्तान सहित कई ऐसे देशों में सक्रिय हैं, जहां गैरकानूनी तरीके से लोगों को फंसाकर उन्हें बंधुआ मजदूरों की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है.
अलजजीरा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में करीब 20 हजार ईंट भट्ठों पर 40 लाख लोग बंधुआ मजदूर के रूप में काम करते हैं. इन मजदूरों के परिवार वालों ने दशकों पहले कभी भट्ठा मालिकों से कर्ज लिया था. जव उनके दादा- परदादा इसे नहीं चुका पाए तो बेटे- पोतों को कर्ज चुकाने के लिए काम पर लगा दिया गया.
पाकिस्तान में 16 साल से कम उम्र के बच्चों से काम करवाना गैरकानूनी है. फिर भी पाकिस्तान में मौजूद बंधुआ मजदूरों में लगभग 70 प्रतिशत बच्चे हैं. जिनकी संख्या 10 लाख के करीब है. अक्सर बच्चे अपने माता पिता के कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं औरप लंबे समय तक उनके कर्जदार रहते हैं. यदि माता-पिता भट्टी छोड़कर चले जाते हैं तो बच्चे बंधक बनकर रह जाते हैं.
उच्च ब्याज दर, कम वेतन, कटौतियों और भट्ठा मालिकों के बहीखातों में दर्ज फर्जीवाड़े की वजह से इन मजदूरों का कर्ज लगातार बढञता जा रहा है, जिन्हें वे देख भी नहीं पाते हैं और आने वाली पीढ़ियां इस कर्ज के जाल में फंसती चली जाती है.
ग्लोबल स्लेवरी इंडेस्क के मुताबिक, 2016 में लगभग 25 मिलियन लोग जबरन श्रम में फंसे हुए थे. इसकी 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को इस सूची में आठवें स्थान पर रखा गया है. पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट की थी कि ईंट भट्ठों पर काम करने वाले बच्चों में मृत्युदर बहुत अधिक है. इसके अलावा लगभग 20 परिवारों में एक ऐसे बच्चे हैं, जिनकी आंखों की रोशनी चली गई है.
पाकिस्तान के ऐसे ही बंधुआ मजदूर परिवार को ईंट भट्ठे में कर्ज के जाल में फंसकर पिसने से बचाया गया. इनका कर्जा आरोन ने वापस कर इन्हें आजादी दिला दी. जब वे फ्री हुए तो उस अहसास की वजह से उनके आंखों से आंसू छलक आए और वे आरोन से लिपटकर रोने लगे.
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