जंग अभी लंबी चलेगी? ईरान ने दिखाया ड्रोन का जखीरा, IRGC ने जारी किया सुरंग का वीडियो

ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी ड्रोन ताकत का प्रदर्शन किया है. IRGC द्वारा जारी एक वीडियो में भूमिगत सुरंग में रखे शाहेद ड्रोन का बड़ा जखीरा दिखाई देता है, जिससे संकेत मिलता है कि ईरान लंबे संघर्ष के लिए तैयार है.

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ये है ईरान का शाहेद-136 ड्रोन जिसने जंग की परिभाषा ही बदल दी है. (Photo: IRGC) ये है ईरान का शाहेद-136 ड्रोन जिसने जंग की परिभाषा ही बदल दी है. (Photo: IRGC)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 15 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 11:06 AM IST

अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे सैन्य तनाव के बीच ईरान ने अपनी ताकत का एक और प्रदर्शन किया है. ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें हमलावर ड्रोन और यूएवी का बड़ा जखीरा एक विशाल भूमिगत सुरंग में रखा हुआ दिखाई देता है.

यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच टकराव को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ी हुई है. वीडियो देखकर ऐसा लगता है कि ईरान के पास अभी भी बड़ी मात्रा में हथियार मौजूद हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इससे संकेत मिलता है कि ईरान झुकने के मूड में नहीं है और यह संघर्ष अभी लंबा चल सकता है.

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इस टकराव के दौरान ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र की ओर कम लागत वाले ‘शाहेद’ ड्रोन भी भेजे हैं. बताया जा रहा है कि इन ड्रोन का निशाना सैन्य ठिकाने और ऊर्जा से जुड़े ढांचे रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक इन ड्रोन को इस्तेमाल करना आसान होता है, लेकिन इन्हें जमीन पर पूरी तरह नष्ट करना मुश्किल होता है. यही वजह है कि ईरान इनका बार-बार इस्तेमाल कर रहा है.

देखें वीडियो

 

ड्रोन का लंबा जखीरा

वीडियो में सुरंग के अंदर कई ड्रोन लाइन में खड़े दिखाई देते हैं. कुछ ड्रोन लॉन्चर पर लगे हुए हैं, जबकि कुछ स्टैंड पर रखे हुए हैं. सुरंग के अंदर नारंगी-लाल रोशनी में ये ड्रोन साफ दिखाई देते हैं. दीवारों पर ईरानी झंडे और कुछ सैन्य उपकरण भी नजर आते हैं. यह फुटेज ईरान के सरकारी मीडिया प्रेस टीवी ने शेयर किया है. उनका कहना है कि यह IRGC के ड्रोन हथियारों के भंडार का एक हिस्सा है.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सुरंग ईरान की तथाकथित “मिसाइल सिटी” या किसी भूमिगत सैन्य ठिकाने का हिस्सा हो सकती है. ईरान पहले भी ऐसे ठिकानों का खुलासा कर चुका है. इससे पहले “ओकाब-44 (Eagle 44)” नाम के एक भूमिगत एयरबेस की जानकारी सामने आई थी, जहां फाइटर जेट और ड्रोन को सुरक्षित रखा जाता है ताकि दुश्मन के हमलों से उन्हें बचाया जा सके.

ड्रोन ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के भूमिगत ठिकाने ईरान की सैन्य रणनीति का अहम हिस्सा हैं. यहां ड्रोन और मिसाइलों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है और जरूरत पड़ने पर जल्दी तैनात किया जा सकता है.

दूसरी ओर अमेरिका का दावा है कि वह ईरान की सैन्य क्षमता को लगातार कमजोर कर रहा है. इसके बावजूद ड्रोन हमलों की घटनाओं ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को अपने रक्षा सिस्टम सक्रिय रखने पर मजबूर कर दिया है.

इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से 'बिना शर्त आत्मसमर्पण' की मांग कर चुके हैं, लेकिन तेहरान ने इसे मानने से इनकार कर दिया है. इसके बजाय ईरान ने संघर्ष को खाड़ी क्षेत्र तक फैला दिया है. इसके चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस की आवाजाही प्रभावित हुई है, जिससे दुनिया भर में ऊर्जा कीमतों पर दबाव बढ़ गया है.

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