यहां काम जिंदगी नहीं, बस उसका हिस्सा है! भारतीय ने बताया कैसा है पोलैंड का वर्क कल्चर

विदेश में नौकरी सिर्फ पैसों के लिए नहीं होती.यह बात पोलैंड में काम कर रहे एक भारतीय प्रोफेशनल ने साबित कर दी. उनके मुताबिक, वहां की कंपनियां कर्मचारियों को इतना बैलेंस देती हैं कि काम और जिंदगी दोनों साथ चलते हैं.

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 भारतीय ने बताया कि यहां सैलरी से ज्यादा वर्क लाइफ बैलेंस को अहमियत दी जाती है (Photo:Insta/@Anirudh Sharma) भारतीय ने बताया कि यहां सैलरी से ज्यादा वर्क लाइफ बैलेंस को अहमियत दी जाती है (Photo:Insta/@Anirudh Sharma)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 05 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:25 PM IST

विदेश में नौकरी की बात आते ही सबसे पहले दिमाग में सैलरी आती है, लेकिन पोलैंड में काम कर रहे एक भारतीय प्रोफेशनल ने इस सोच को थोड़ा बदल दिया है. उनका कहना है कि वहां असली फायदा सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस है.

अनिरुद्ध शर्मा, जो पोलैंड में बैंकिंग सेक्टर में काम करते हैं, उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर अपने अनुभव बताए. उन्होंने बताया कि वहां की कंपनियां कर्मचारियों को फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स देती हैं. उनका काम सुबह 8 बजे शुरू होता है और शाम 4 बजे तक खत्म हो जाता है, जिससे उन्हें अपने लिए काफी समय मिल जाता है.

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उन्होंने यह भी बताया कि हफ्ते में 2 से 3 दिन वर्क फ्रॉम होम की सुविधा मिलती है, जिससे काम और पर्सनल लाइफ के बीच संतुलन बनाए रखना आसान हो जाता है.

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सैलरी के अलावा मिलने वाले फायदे भी काफी दिलचस्प हैं. अगर कोई कर्मचारी पब्लिक हॉलिडे पर काम करता है, तो उसे डबल पे मिलता है. वहीं ओवरटाइम के लिए डेढ़ गुना सैलरी दी जाती है.

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सिर्फ काम ही जिंदगी नहीं...

अनिरुद्ध के मुताबिक, पोलैंड की कंपनियां कर्मचारियों की सेहत को भी काफी महत्व देती हैं. बीमार होने पर लगभग 80 प्रतिशत सैलरी मिलती है, जबकि कुछ कंपनियां पूरी सैलरी भी देती हैं. इसके अलावा ट्रेकिंग, टीम आउटिंग और वेलनेस प्रोग्राम जैसी गतिविधियों के जरिए कर्मचारियों को फिट और खुश रखने की कोशिश की जाती है.

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कई कंपनियां मल्टीस्पोर्ट कार्ड जैसी सुविधाएं भी देती हैं, जिससे जिम, स्विमिंग और अन्य फिटनेस एक्टिविटीज का फायदा उठाया जा सकता है. कुछ ऑफिस में कर्मचारियों के लिए ब्रेकफास्ट की सुविधा भी होती है.

छुट्टियों की बात करें तो यहां साल में 20 से 26 दिन की पेड लीव मिलती है. कुछ कंपनियां कम से कम दो हफ्ते की लगातार छुट्टी लेना जरूरी भी मानती हैं. इसके अलावा 2 से 3 ऑप्शनल छुट्टियां भी मिलती हैं, जिन्हें कर्मचारी अपनी जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल कर सकते हैं.

इतना ही नहीं, पैरेंटल लीव भी यहां काफी लंबी होती है, जो 52 हफ्तों तक चल सकती है और इसमें सरकार व कंपनी दोनों का सपोर्ट मिलता है.

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