आजकल विदेश यात्रा करना लोगों के लिए सपना माना जाता है, खासकर अमेरिका जैसे देश जाना. लेकिन हाल ही में एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने अमेरिका यात्रा के दौरान हुए महंगे खर्च और पैसों की चिंता के बारे में खुलकर बात की है. इस वीडियो ने लोगों के बीच चर्चा शुरू कर दी है कि विदेश में रहना और घूमना कितना महंगा हो सकता है. भारतीय महिला आकृति पांडे ने अपने इंस्टाग्राम वीडियो में बताया कि जब आप भारत में रुपये कमाते हैं और अमेरिका में डॉलर में खर्च करते हैं, तो हर चीज बहुत महंगी लगने लगती है.
उन्होंने कहा कि डॉलर की तुलना में भारतीय रुपया कमजोर होने के कारण हर खर्च को रुपये में बदलकर देखना और भी तनाव बढ़ा देता है. उन्होंने बताया कि एक डॉलर की कीमत लगभग 93 से 95 रुपये के बीच है, जिससे छोटी-छोटी चीजें भी बहुत महंगी महसूस होती हैं.
ट्रांसपोर्ट और रहने का खर्च भी भारी
महिला ने अपने अनुभव शेयर करते हुए बताया कि अमेरिका में कई जगहों पर सार्वजनिक परिवहन बहुत सीमित है. ऐसे में यात्रियों को उबर या टैक्सी पर निर्भर रहना पड़ता है, जो काफी महंगा होता है. उन्होंने बताया कि एक रात में होटल तक जाने के लिए उन्हें लगभग 67 डॉलर यानी करीब 5,000 रुपये खर्च करने पड़े. उनके अनुसार, यह खर्च भारतीय लोगों के लिए काफी ज्यादा है.
खाने-पीने की कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
आकृति ने खाने-पीने की चीजों की कीमतों का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि अमेरिका में कॉफी से लेकर भारतीय खाने तक सब कुछ बहुत महंगा है. उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि बे एरिया में सिर्फ तीन डोसे की कीमत लगभग 57 डॉलर यानी करीब 5,300 रुपये पड़ती है. यह सुनकर कई लोगों को हैरानी हुई क्योंकि भारत में यही खाना बहुत कम कीमत में मिल जाता है.
सोशल मीडिया पर मिली मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस वीडियो के वायरल होने के बाद लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. कई यूजर्स ने कहा कि जब कोई व्यक्ति रुपये में कमाता है और डॉलर में खर्च करता है, तो ऐसी चिंता होना बिल्कुल स्वाभाविक है. कुछ लोगों ने लिखा कि विदेश यात्रा तभी आसान लगती है जब खर्च किसी कंपनी या स्पॉन्सर द्वारा दिया जा रहा हो. वहीं कुछ ने कहा कि क्रेडिट कार्ड का बिल आने के बाद असली खर्च का पता चलता है.
पैसों की तुलना बनी बड़ी समस्या
महिला ने यह भी कहा कि कई लोग सलाह देते हैं कि हर चीज को रुपये में बदलकर नहीं देखना चाहिए, लेकिन यह आसान नहीं होता. जब कमाई रुपये में हो और खर्च डॉलर में, तो हर चीज का हिसाब दिमाग में चलता रहता है. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी स्थिति में पैसों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है और कई लोग इसी तनाव से गुजरते हैं.
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