बैंकॉक में रह रही एक भारतीय महिला का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में महिला ने आधुनिक शहरों की तेज रफ्तार जिंदगी और हर चीज तुरंत पाने की आदत पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि वह ऐसी जिंदगी से ज्यादा सुकून और शांति को अहमियत देती हैं. लोगों को उनका नजरिया इतना पसंद आया कि वीडियो पर हजारों प्रतिक्रियाएं आने लगीं.
इस महिला का नाम श्रेया महेंद्रू है, जो रिमोट वर्क करती हैं और फिलहाल बैंकॉक में रह रही हैं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर वीडियो शेयर करते हुए बताया कि आखिर क्यों उन्होंने बैंकॉक जैसे शहर को अपने रहने के लिए चुना. वीडियो में उन्होंने साफ-सफाई, शांत माहौल, कम शोर और बेहतर लाइफस्टाइल जैसी चीजों को जिंदगी की बुनियादी जरूरत बताया.
जिंदगी की बुनियादी बातें
श्रेया ने कहा कि उन्हें सुबह उठकर ट्रैफिक के हॉर्न सुनने से ज्यादा चिड़ियों की चहचहाहट पसंद है. वीडियो में टेक्स्ट ओवरले के जरिए उन्होंने लिखा कि उन्हें ‘नीला आसमान’ चाहिए. उन्होंने कहा कि उनकी जिंदगी में ट्रैफिक के हॉर्न से ज्यादा पक्षियों की चहचहाहट की आवाज सुनाई देती है. उनका मानना है कि आजकल शहरों में हर चीज को तेज और सुविधाजनक बनाने की दौड़ में लोग जिंदगी की बुनियादी खुशियों को भूलते जा रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि बेहतर जिंदगी सिर्फ सरकार के भरोसे नहीं बन सकती, बल्कि इसमें नागरिकों की जिम्मेदारी भी उतनी ही जरूरी है. श्रेया के मुताबिक, रिमोट वर्क ने उन्हें अलग-अलग देशों में रहने और वहां की लाइफस्टाइल को करीब से देखने का मौका दिया. इसी दौरान उन्हें बैंकॉक ऐसा शहर लगा, जहां जिंदगी ज्यादा शांत और संतुलित महसूस होती है.
देखें वायरल वीडियो
उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर शहरी जिंदगी को लेकर एक बड़ी बहस का कारण बन गया. कई लोगों ने कमेंट कर कहा कि भारत के बड़े शहरों में शोर, ट्रैफिक और प्रदूषण इतना सामान्य हो चुका है कि लोग अब शांत माहौल की कल्पना भी नहीं करते. वहीं कुछ लोगों का कहना है कि भारत के गांवों और छोटे शहरों में जीवन आज भी काफी शांत और सुकूनभरा है.
कुछ यूजर्स ने लिखा कि विदेश घूमने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि रोजमर्रा की भागदौड़ मानसिक रूप से कितनी थका देने वाली हो सकती है. वहीं कई लोगों का मानना था कि आज की युवा पीढ़ी, खासकर रिमोट वर्क करने वाले प्रोफेशनल्स, अब तेज रफ्तार जिंदगी की बजाय मानसिक शांति, साफ वातावरण और बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा महत्व देने लगी है.
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