तेज दुनिया से अलग इस शहर में स्लो लाइफ का जश्न, घोंघों की रेस बनी आकर्षण

एक ऐसी जगह, जहां तेजी नहीं बल्कि धीमी जिंदगी को बढ़ावा दिया जाता है, उसी शहर में घोंघों की रेस आयोजित हुई और अब इस अनोखी रेस की हर तरफ चर्चा है. आइए जानते हैं उस शहर की कहानी, जिसने तेज चलना नहीं, बल्कि 'स्लो' रहना चुना.

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घोंघा इस शहर का प्रतीक भी है (सांकेतिक तस्वीर:Getty) घोंघा इस शहर का प्रतीक भी है (सांकेतिक तस्वीर:Getty)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:50 AM IST


दुनिया जहां तेज भागदौड़ से भरी है, वहीं कभी-कभी ऐसे पल आते हैं जब लोग सोचने पर मजबूर हो जाते हैं.आखिर इतनी भागदौड़ क्यों? क्या जिंदगी का मतलब सिर्फ तेजी है? क्या कुछ काम धीरे नहीं हो सकते? इसी सोच और फिलॉसफी पर ताइवान के हुलिएन काउंटी में बसा छोटा सा शहर फेंगलिन चलता है.

इस शहर में लोग तेज रफ्तार जिंदगी नहीं, बल्कि धीमी और संतुलित जीवनशैली को सेलिब्रेट करते हैं. यही वजह है कि यहां आयोजित होने वाली अनोखी घोंघा रेस (Snail Race) अब पूरे ताइवान में चर्चा का विषय बन गई है. घोंघा, जिसकी रफ्तार बेहद धीमी होती है, यहां की पहचान बन चुका है. अंग्रेजी में 'Snail pace' यानी घोंघे की चाल का मतलब भी धीमी गति ही होता है.

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घोंघे से सीखें जिंदगी जीना

घोंघा इस शहर का प्रतीक भी है. करीब 10,000 की आबादी वाले फेंगलिन ने साल 2014 में Cittaslow (स्लो सिटी नेटवर्क) से जुड़कर अपनी अलग पहचान बनाई. इस नेटवर्क का प्रतीक भी घोंघा है, जो धैर्य, संतुलन और शांत जीवन का संदेश देता है.

साल 2024 में आए भूकंप के बाद यहां का पर्यटन बुरी तरह प्रभावित हुआ. पर्यटकों की संख्या घटने लगी, तो स्थानीय लोगों ने अपनी इसी ‘धीमी पहचान’ को आकर्षण का केंद्र बनाने का फैसला किया. नतीजा पांच साल बाद एक बार फिर भव्य घोंघा रेस का आयोजन किया गया.

ऐसी हुई रेस

इस बार की रेस में पूरे ताइवान से प्रतिभागी अपने-अपने घोंघों के साथ पहुंचे. रेस का फॉर्मेट बेहद सरल और दिलचस्प था. एक गोल टेबल के बीच घोंघों को रखा गया और जो सबसे पहले 33 सेंटीमीटर दूर किनारे तक पहुंचा, वही विजेता बना. इस साल 'ब्रदर स्नेल' नाम का घोंघा चैंपियन रहा, जिसने 3 मिनट 3 सेकंड में यह दूरी तय कर ली.

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कई प्रतिभागी अपने घोंघों को खास तरीके से तैयार करते हैं. उन्हें ताजे फल, सब्जियां और शकरकंद के पत्ते खिलाए जाते हैं. एक कपल तो अपने 'जायंट अफ्रीकन स्नेल' के साथ करीब पांच घंटे का सफर तय करके यहां पहुंचा.

फेंगलिन सिर्फ घोंघा रेस तक सीमित नहीं है. यहां ई-बाइक टूर, जापानी काल की इमारतें, पुराने तंबाकू गोदाम और हक्का संस्कृति भी पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. शहर का शांत माहौल, हरियाली और स्लो लाइफस्टाइल लोगों को खासा पसंद आ रहा है.

आयोजकों का कहना है कि इस इवेंट का मकसद सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि यह संदेश देना भी है कि हर बार तेज भागना जरूरी नहीं होता. कभी-कभी धीरे चलकर भी जिंदगी का असली आनंद लिया जा सकता है.फेंगलिन का सीधा संदेश है-धीरे चलो, खुश रहो और प्रकृति का आनंद लो

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