'बेटे के लिए वक्त नहीं…', कॉरपोरेट जॉब से परेशान पिता की पोस्ट वायरल

कॉर्पोरेट लाइफ और पितृत्व के बीच फंसे एक शख्स की दर्दभरी कहानी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है. 12 घंटे की नौकरी और बेटे के साथ बिताने के लिए वक्त की कमी. इस पोस्ट ने हजारों लोगों को अपनी जिंदगी का आईना दिखा दिया.

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शख्स ने बताया कि उसका बेटा जब खुशी-खुशी उसके पास रेंगते हुए आता है (Representative image -Pexel) शख्स ने बताया कि उसका बेटा जब खुशी-खुशी उसके पास रेंगते हुए आता है (Representative image -Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 13 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 4:29 PM IST

बेंगलुरु के एक प्रोफेशनल की भावुक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर बड़ी बहस छेड़ दी है. रेडिट पर शेयर की गई इस पोस्ट में उसने कॉर्पोरेट नौकरी और पिता होने के बीच फंसी अपनी जिंदगी का दर्द बयां किया है.

उसने लिखा कि 11 से 11 की नौकरी ने उसे पूरी तरह थका दिया है. लेकिन असली तकलीफ लंबे काम के घंटे नहीं, बल्कि वो पल हैं जो वह अपने एक साल के बेटे के साथ नहीं बिता पा रहा. पोस्ट का टाइटल था- अपने बेटे के लिए कॉर्पोरेट गुलामी छोड़ने की कोशिश

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शख्स ने बताया कि उसका बेटा जब खुशी-खुशी उसके पास रेंगते हुए आता है और गोद में उठाने या खेलने की उम्मीद करता है, तब अक्सर वह उसे मना कर देता है. वजह होती है कोई जरूरी कॉल या काम की मजबूरी. उसने लिखा कि उस समय बेटे के चेहरे का एक्सप्रेशन उसे अंदर तक तोड़ देता है और हर बार उसका दिल टूट जाता है.

पोस्ट में उसने साफ कहा कि मैं इन पलों को मिस नहीं करना चाहता, क्योंकि ये पल दोबारा वापस नहीं आएंगे. यही बात लोगों को सबसे ज्यादा छू गई और देखते ही देखते यह पोस्ट वायरल हो गई.

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस पर अपनी राय और अनुभव साझा किए. एक यूजर ने लिखा कि वह घर का अकेला कमाने वाला है और कई बार नौकरी छोड़ने का मन करता है, लेकिन बच्चे के भविष्य, घर और रिटायरमेंट की जिम्मेदारियां उसे रोक लेती हैं.

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वहीं दूसरे यूजर ने सलाह दी कि ऐसे समय में स्थिर नौकरी छोड़ना सही नहीं है, खासकर जब बच्चा छोटा हो. बेहतर है कि पहले कोई नया काम साइड में शुरू किया जाए और फिर धीरे-धीरे बदलाव किया जाए.

एक अन्य यूजर ने कहा कि बच्चों के साथ समय बिताना जरूरी है, लेकिन इसके लिए नौकरी छोड़ना ही एकमात्र रास्ता नहीं है. समय का सही प्रबंधन और वीकेंड्स पर परिवार के साथ वक्त बिताना भी एक समाधान हो सकता है.

यह पोस्ट एक बड़े सवाल को सामने लाती है-क्या आज के दौर में काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना इतना मुश्किल हो गया है.

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