पहले जॉब से निकाला, फिर बुलाकर रिप्लेसमेंट को ट्रेन करवाया… महिला की कहानी वायरल

एक महिला ने अपनी नौकरी का ऐसा अनुभव साझा किया है, जिसे पढ़कर लोग हैरान हैं. कंपनी ने पहले काम नहीं है कहकर निकाल दिया, फिर उसी रोल के लिए नए लोगों को रखने के बाद उसे वापस बुलाकर उन्हीं को ट्रेनिंग देने को कहा.

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 इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी  (Photo: Representational Image from Pexels) इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी (Photo: Representational Image from Pexels)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 12 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 3:33 PM IST

आज के समय में जॉब की दुनिया में स्थिरता और सम्मान दोनों ही बड़ी बातें मानी जाती हैं, लेकिन एक महिला के साथ जो हुआ, उसने वर्कप्लेस कल्चर पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर वायरल हो रही इस पोस्ट में महिला ने बताया कि कंपनी ने उसे यह कहकर नौकरी से निकाल दिया कि 'अब काम नहीं है.'

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हालांकि कुछ समय बाद उसे पता चला कि उसी रोल के लिए दो नए लोगों को हायर कर लिया गया है. यह बात उसके लिए काफी चौंकाने वाली थी.

महिला ने अपने अनुभव में यह भी बताया कि नौकरी के दौरान उसे कभी टीम का हिस्सा जैसा महसूस नहीं कराया गया. नए कर्मचारियों को टीम में इंट्रोड्यूस किया जाता था, लेकिन उसे कभी सही तरीके से शामिल नहीं किया गया. कई मीटिंग्स में भी उसे बुलाया नहीं जाता था, जिससे वह खुद को अलग-थलग महसूस करती थी.

कुछ महीनों बाद कंपनी ने फिर उससे संपर्क किया और उसे वापस आने का ऑफर दिया. महिला ने यह सोचकर ऑफर स्वीकार कर लिया कि इससे उसके करियर में गैप नहीं आएगा.लेकिन वापस आने के बाद स्थिति और भी अजीब हो गई. जिन लोगों को उसकी जगह पर रखा गया था मैं उनको ट्रेनिंग दे रही थी., अब वही उसे काम दे रहे थे और निर्देश दे रहे थे. वह खुद एक टेम्परेरी रोल में थी, जबकि बाकी सभी फुल-टाइम कर्मचारी थे.

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महिला ने इस अनुभव को अजीब और थोड़ा अपमानजनक बताया, हालांकि उसने यह भी कहा कि अब वह इस नौकरी से भावनात्मक रूप से जुड़ी नहीं है और आगे बढ़ने पर ध्यान दे रही है.

इस पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी. कुछ ने सलाह दी कि उसे वापस आने से पहले बेहतर शर्तों पर बातचीत करनी चाहिए थी, जबकि कुछ ने कहा कि ऐसी स्थिति में कंसल्टिंग फीस मांगना सही रहता. यह पूरी घटना एक बड़ा सवाल खड़ा करती है-क्या कंपनियों में कम्युनिकेशन और ट्रांसपेरेंसी की कमी कर्मचारियों के लिए ऐसे ही अनुभव पैदा करती है? और क्या अब समय आ गया है कि वर्कप्लेस में सम्मान और स्पष्टता को ज्यादा महत्व दिया जाए?

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