स्टार्टअप की तेज रफ्तार दुनिया में अक्सर यही सिखाया जाता है जितना ज्यादा काम, उतनी बड़ी सफलता. लेकिन अमेरिका में एक युवा एग्जीक्यूटिव ने इस सोच पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है.अमेरिका के एक एआई स्टार्टअप के चीफ मार्केटिंग ऑफिसर ने 12 घंटे की वर्किंग लाइफ से परेशान होकर करोड़ों की नौकरी छोड़ दी. यह फैसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है.
कौन हैं डैनियल मिन, जिन्होंने छोड़ी करोड़ों की नौकरी?
यह मामला एआई स्टार्टअप Cluely से जुड़ा है. यहां 22 साल के डैनियल मिन ने चीफ मार्केटिंग ऑफिसर यानी सीएमओ पद से इस्तीफा दे दिया. डैनियल मिन का कहना है कि लगातार 12 घंटे काम करने की डेली लाइफ उनकी निजी जिंदगी को पूरी तरह निगलती जा रही थी.
2.7 रुपये करोड़ की सैलरी, फिर भी नहीं मिला सुकून
डैनियल मिन ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए एक वीडियो में बताया कि उन्हें सालाना तीन लाख डॉलर से ज्यादा, यानी करीब 2.7 करोड़ रुपये की सैलरी मिल रही थी. इसके बावजूद वह अपनी जिंदगी के सबसे अहम पल खोते जा रहे थे जैसे-दोस्तों के साथ खाना, परिवार के साथ वक्त और यहां तक कि अपने छोटे भाई के जन्मदिन पर उसे सरप्राइज देने का मौका भी.
डैनियल कहते हैं कि 21 साल की उम्र में मुझे लगता था कि दिन-रात काम करना ही सही रास्ता है. लेकिन धीरे-धीरे मुझे एहसास हुआ कि मैं जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियां मिस कर रहा हूं.
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21 की उम्र में सीएमओ, 8 महीने में बदला फैसला
डैनियल मिन मई 2025 में क्लूली से जुड़े थे. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ 21 साल थी. उन्होंने हाल ही में The Wharton School से मार्केटिंग और ऑपरेशंस मैनेजमेंट में पढ़ाई पूरी की थी.शुरुआत में काम उन्हें बेहद रोमांचक लगा. बड़ी जिम्मेदारी और तेज ग्रोथ ने उन्हें उत्साहित किया. लेकिन चार महीने के भीतर ही हालात बदलने लगे.
जब जुनून बोझ में बदलने लगा
डैनियल के मुताबिक, समय के साथ उनका काम एक जैसा और उबाऊ लगने लगा. लीडर होने के नाते मैं अपना सौ प्रतिशत दे रहा था. शुरुआत में सब कुछ शानदार था, लेकिन धीरे-धीरे वही रूटीन, वही दबाव… सब कुछ बोझ लगने लगा.
सीईओ के सामने फूट-फूटकर रो पड़े
जब क्लूली के सीईओ रॉय ली ने डैनियल की उदासी महसूस की और उनसे बातचीत की, तो वह खुद को संभाल नहीं पाए.उन्होंने बताया कि मैंने उन्हें बताया कि मैं काफी वक्त से कंपनी छोड़ने के बारे में सोच रहा हूं, और यह कहते हुए मैं रो पड़ा.डैनियल के मुताबिक, कंपनी के सीईओ ने उन्हें पूरा समर्थन दिया और कहा कि उन्हें वही रास्ता चुनना चाहिए जिससे वह खुश रह सकें.
‘यह वो सीढ़ी नहीं थी, जिस पर मैं चढ़ना चाहता था’
डैनियल मिन कहते हैं कि क्लूली उनके लिए सिर्फ एक कंपनी नहीं, बल्कि एक तरह का भाईचारा था जहां वे रोज़ करीब 12 घंटे साथ बिताते थे. लेकिन आखिरकार उन्हें एहसास हुआ कि यही वह रास्ता नहीं है, जिस पर वह अपनी जिंदगी आगे ले जाना चाहते हैं.आखिरी में डैनियल मिन ने कहा कि मुझे समझ आ गया कि मुझे किस तरह की जिंदगी चाहिए.
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