परिवार गया, हौसला नहीं… साइकिल बनी सहारा, बुजुर्ग की कहानी वायरल

एक भयानक हादसे में पूरा परिवार खो देने के बाद जहां आम इंसान टूट जाता है, वहीं चीन के 90 साल के इस बुजुर्ग ने दर्द को ही अपना सहारा बना लिया. पिछले 30 सालों से वह साइकिल पर पूरे देश में घूम रहे हैं.

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साउथ मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक,एक पल में पूरा परिवार खत्म हो गया (सांकेतिक तस्वीर-Pexel) साउथ मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक,एक पल में पूरा परिवार खत्म हो गया (सांकेतिक तस्वीर-Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 5:03 PM IST

दुनिया में दर्द की कमी नहीं है. लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो उसी दर्द को अपनी ताकत बना लेते हैं. चीन के झांग झोंगयी की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैय.दर्द से टूटे, लेकिन रुके नहीं.

90 साल के झांग झोंगयी की जिंदगी 1990 के दशक में एक ही झटके में उजड़ गई. एक भयानक सड़क हादसे में उन्होंने अपना बेटा, बहू और महज 8 साल का नाती खो दिया. यह सदमा इतना गहरा था कि उनकी पत्नी भी टूट गईं. लगातार रोते-रोते उनकी आंखों की रोशनी चली गई और कुछ समय बाद उन्होंने भी दुनिया छोड़ दी.

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साउथ मॉर्निग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक,एक पल में पूरा परिवार खत्म हो गया. झांग अकेले रह गए. दर्द इतना गहरा था कि उन्होंने घर-बार छोड़ दिया और भटकने लगे. लेकिन इसी भटकन में उन्हें जीने का एक सहारा मिला-साइकिल.

साइकिल से किया सफर

शुरुआत एक साधारण साइकिल से हुई. फिर उन्होंने तीन पहियों वाली ट्राइसाइकिल ले ली. और बस, चल पड़े. पिछले करीब 30 सालों से वह चीन के शहरों, गांवों, पहाड़ों, रेगिस्तानों और समुद्र किनारों तक का सफर कर चुके हैं. उनके पास ज्यादा कुछ नहीं-बस एक ट्राइसाइकिल, थोड़ा सा सामान और आगे बढ़ते रहने की जिद.

हाल ही में फुजियान प्रांत के पुटियान शहर में एक महिला, बाई श्याओबाई, ने उन्हें सड़क पर ट्राइसाइकिल धकेलते देखा. उसने मदद की और बातचीत में झांग ने अपनी पूरी कहानी सुना दी. महिला ने इसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया और देखते ही देखते यह कहानी वायरल हो गई.

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जिंदगी ऐसे जी जाती है

अब हालात बदल गए हैं. लोग उन्हें रास्ते में पहचानने लगे हैं. कोई पानी देता है, कोई खाना, तो कोई उनकी ट्राइसाइकिल पर रिफ्लेक्टिव टेप लगवा देता है, ताकि रात में वह सुरक्षित रह सकें.सबसे खास बात-झांग खुद भी रास्ते में लापता लोगों के पोस्टर चिपकाते चलते हैं. शायद वो नहीं चाहते कि कोई और परिवार उस दर्द से गुजरे, जिससे वह खुद गुजर चुके हैं.

जब उनसे पूछा जाता है कि अब जिंदगी से क्या चाहते हैं, तो वह हल्की मुस्कान के साथ कहते हैं-अतीत को मैंने छोड़ दिया है. अब बची हुई जिंदगी यात्रा करते हुए बिताना चाहता हूं.

90 साल की उम्र में भी उनका दिमाग तेज है, बातें साफ और चेहरे पर मुस्कान कायम है.आज लोग कह रहे हैं- यह बुजुर्ग अकेले नहीं हैं, अब पूरा चीन उनके साथ चल रहा है.

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