चीन का सबसे बड़ा हेल्थ घोटाला! बिना बीमारी लोगों को बना दिया ‘मानसिक रोगी’

रिपोर्ट के अनुसार हुबेई प्रांत के शिआंगयांग स्थित कई निजी मानसिक अस्पताल कथित रूप से ‘फ्री हॉस्पिटलाइजेशन’ का लालच देकर लोगों को लंबे समय तक भर्ती करते थे.

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यह मामला सबसे पहले बीजिंग न्यूज की रिपोर्ट में सामने आया. (Photo: Representational , pexel) यह मामला सबसे पहले बीजिंग न्यूज की रिपोर्ट में सामने आया. (Photo: Representational , pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 फरवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:56 PM IST

चीन के मध्य क्षेत्र में स्थित कई निजी मनोचिकित्सीय अस्पतालों पर इन दिनों सवाल उठ रहे हैं. वजह है एक अंडरकवर जांच, जिसमें दावा किया गया कि गंभीर मानसिक बीमारी न होने के बावजूद लोगों को जबरन दाखिल किया गया, ताकि देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य बीमा प्रणाली से पैसा हड़पा जा सके. यह मामला सबसे पहले बीजिंग न्यूज की रिपोर्ट में सामने आया, जिसे बाद में साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने भी प्रकाशित किया.

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कैसे होता था ये घोटाला

रिपोर्ट के अनुसार हुबेई प्रांत के शिआंगयांग स्थित कई निजी मानसिक अस्पताल कथित रूप से ‘फ्री हॉस्पिटलाइजेशन’ का लालच देकर लोगों को लंबे समय तक भर्ती करते थे. चीन की मेडिकल इंश्योरेंस प्रणाली में मरीजों को केवल थोड़ी राशि देनी होती है, जबकि बाकी रकम सरकार वहन करती है और कथित तौर पर इसी खामी का फायदा उठाया गया.

अंडरकवर पत्रकार ने जब एक रिश्तेदार का नाटक कर 10 से अधिक अस्पतालों से संपर्क किया, तो सभी ने कम खर्च में लंबे समय तक भर्ती रखने की पेशकश की. एक स्टाफ सदस्य ने तो साफ कहा-हम चाहते हैं कि आपका रिश्तेदार यहां लंबे समय तक रहे.

इसके बाद पत्रकार ने शियांगयांग होंगआन मनोरोग अस्पताल में नर्स की नौकरी भी हासिल कर ली. अंदर की स्थिति और भी चौंकाने वाली थी-कई मरीज हल्के या बिल्कुल भी लक्षण नहीं दिखाते थे.कुछ बुजुर्ग अस्पताल को सस्ते नर्सिंग होम की तरह उपयोग कर रहे थे.एक नर्स ने स्वीकार किया कि उसे भी झूठा इनपेशेंट दिखाया गया, जबकि वह सामान्य रूप से काम करता रहा.एक मरीज, जिसने 90 दिन अस्पताल में बिताए, उसे 12,426 युआन का बिल दिया गया, जिसमें लगभग 6,000 युआन ऐसे इलाजों के लिए थे, जो उसके अनुसार कभी हुए ही नहीं.

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शोषण, पाबंदियां और स्टाफ को कमीशन

धोखाधड़ी के अलावा, रिपोर्ट में शारीरिक दुर्व्यवहार, मरीजों के मोबाइल जब्त करने, और परिवार से संपर्क सीमित करने जैसी शिकायतें भी शामिल हैं.स्टाफ को नए मरीज भेजने पर 400 से 1,000 युआन तक कमीशन दिया जाता था. दूसरी तरफ, अस्पतालों को सरकारी बीमा से प्रति दिन तय भुगतान मिलता था, जिससे मरीजों को महीनों तक भर्ती रखने की प्रवृत्ति बढ़ी.

चीन के मेडिकल रिफॉर्म विशेषज्ञ Xu Yucai के अनुसार, मनोचिकित्सीय संस्थान ऐसे फर्जीवाड़े के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं, क्योंकि ये बंद वातावरण में संचालित होते हैं और कई मरीज अपनी स्थिति का सही आकलन करने में सक्षम नहीं होते. उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता होता कि उन्हें वास्तविक इलाज मिला भी है या नहीं.

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