बरमूडा ट्रायंगल के नीचे कुछ तो अलग है! वैज्ञानिकों ने खोजा अनोखा रहस्य

बरमूडा ट्रायंगल दुनिया की उन रहस्यमयी जगहों में गिना जाता है, जिसके बारे में सालों से तरह-तरह की कहानियां सुनाई जाती रही हैं. कोई इसे एलियंस से जोड़ता है, तो कोई इसे रहस्यमयी शक्तियों और गुप्त ठिकानों का इलाका मानता है. वैज्ञानिकों की एक टीम ने इस जगह से जुड़ा एक नया भूगर्भीय तथ्य खोजा है, जिसने बरमूडा ट्रायंगल को लेकर फिर से चर्चा तेज कर दी है.

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बरमूडा एक ज्वालामुखी द्वीप है (Photo: Pexel) बरमूडा एक ज्वालामुखी द्वीप है (Photo: Pexel)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 मई 2026,
  • अपडेटेड 11:13 AM IST

दशकों से बरमूडा ट्रायंगल दुनिया के सबसे रहस्यमयी इलाकों में गिना जाता रहा है. कभी जहाज गायब होने की कहानियां, कभी अचानक लापता हुए विमान, तो कभी कंपास खराब होने जैसी घटनाओं ने इसे एलियन और दूसरी दुनिया से जोड़ दिया, लेकिन अब वैज्ञानिकों ने बरमूडा ट्रायंगल के नीचे कुछ ऐसा खोजा है जिसने इस रहस्य को नई दिशा दे दी है.

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 जर्नल Geophysical Research Letters में पब्लिश रिसर्च के मुताबिक वैज्ञानिकों को बरमूडा द्वीप के लगभग 20 किलोमीटर नीचे एक बेहद अनोखी और हल्की चट्टानी परत मिली है. रिसर्चर का कहना है कि ऐसी संरचना अब तक किसी दूसरे समुद्री द्वीप के नीचे नहीं देखी गई. बरमूडा ट्रायंगल अटलांटिक महासागर का एक रहस्यमयी इलाका माना जाता है, जिसे आमतौर पर मियामी, सान जुआन और बरमूडा को जोड़कर बने एक काल्पनिक त्रिकोण के रूप में बताया जाता है. इसी वजह से इसे 'बरमूडा ट्रायंगल' कहा जाता है.

आखिर क्या मिला समुद्र के नीचे?

Carnegie Science और Yale University के भूवैज्ञानिकों ने भूकंप की तरंगों की मदद से धरती के अंदर की 3D इमेज तैयार की. इसमें पता चला कि बरमूडा के नीचे समुद्री सतह और मेंटल के बीच कम घनत्व वाली मोटी चट्टानी पर मौजूद है, जो किसी 'तैरते प्लेटफॉर्म' की तरह काम कर रही है.

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वैज्ञानिकों का मानना है कि करोड़ों साल पहले यहां ज्वालामुखीय गतिविधि खत्म होने के बाद मैग्मा (लावा)  जमा होकर ठंडा हुआ और इसी ने यह हल्की चट्टानी नींव बना दी. यही वजह है कि बरमूडा आज भी समुद्र के ऊपर स्थिर बना हुआ है, जबकि आमतौर पर ज्वालामुखीय द्वीप समय के साथ नीचे धंसने लगते हैं.

क्या इससे जहाज और विमान गायब होने का रहस्य सुलझ गया?

वैज्ञानिकों ने साफ कहा है कि इस खोज का विमान दुर्घटनाओं, जहाजों के गायब होने या कंपास गड़बड़ी जैसी घटनाओं से सीधा संबंध नहीं मिला है. United States Coast Guard समेत कई एजेंसियां पहले भी कह चुकी हैं कि बरमूडा ट्रायंगल में असामान्य संख्या में हादसे होने का कोई पक्का सबूत नहीं है.

विशेषज्ञों के मुताबिक इस इलाके में तेज तूफान, ऊंची लहरें, मौसम का अचानक बदलना और मानवीय गलतियां हादसों की बड़ी वजह हो सकती हैं।

फिर भी क्यों खास है यह खोज?

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज पृथ्वी के भूगर्भीय इतिहास को समझने में बड़ी भूमिका निभा सकती है. कुछ रिसर्चर मान रहे हैं कि यह संरचना उस दौर से जुड़ी हो सकती है जब सुपरकॉन्टिनेंट Breakup of Pangaea टूट रहा था.

अब सवाल यह है कि क्या ऐसी संरचनाएं दूसरे समुद्री द्वीपों के नीचे भी छिपी हो सकती हैं? और क्या इससे महासागरीय द्वीपों के बनने की मौजूदा थ्योरी बदल जाएगी? फिलहाल वैज्ञानिक इन्हीं सवालों के जवाब खोजने में जुटे हैं.

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क्या सच में बरमूडा ट्रायंगल प्लेन को निगल जाता है?

अमेरिका की मौसम और समुद्र से जुड़ी एजेंसी NOAA, US Coast Guard और कई वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, बरमूडा ट्रायंगल में जहाजों या विमानों के गायब होने की घटनाएं दुनिया के दूसरे व्यस्त समुद्री इलाकों से ज्यादा नहीं हैं.

ज्यादातर हादसे खराब मौसम, तूफान, इंसानी गलती, नेविगेशन की परेशानी और समुद्र की तेज धाराओं की वजह से होते हैं. कई बार समुद्र में उठने वाली बहुत बड़ी लहरें भी हादसों का कारण बनती हैं.

वैज्ञानिकों का कहना है कि बरमूडा ट्रायंगल का रहस्य काफी हद तक फिल्मों, कहानियों और मीडिया की वजह से मशहूर हुआ. असल में यह एक सामान्य समुद्री इलाका है, जहां ट्रैफिक ज्यादा होने के कारण हादसे भी ज्यादा सुनने को मिलते हैं. इसमें एलियन या किसी सुपरनैचुरल ताकत जैसी बातों का कोई सबूत नहीं मिला है.
 

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