भारत में इन दिनों तरबूज की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिल रही है. ऐसा दावा कई रिपोर्टों में किया जा रहा है। इसकी वजह ईरान से जुड़े तनाव और निर्यात में आई रुकावट को बताया जा रहा है. निर्यात प्रभावित होने के कारण बड़ी मात्रा में तरबूज अब घरेलू बाजारों में पहुंच रहा है.
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रमजान के महीने में खाड़ी देशों में तरबूज की मांग काफी बढ़ जाती है. भारत से हर साल कतर, यूएई, बहरीन और ओमान जैसे देशों को बड़ी मात्रा में तरबूज भेजा जाता है, लेकिन इस बार क्षेत्रीय तनाव और व्यापारिक अनिश्चितता के कारण निर्यात प्रभावित हुआ है, जिससे भारत के फल व्यापार पर असर पड़ा.
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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बताती है कि निर्यात ठप होने के कारण जो तरबूज और खरबूजे विदेश भेजे जाने थे, वे अब भारत के घरेलू बाजारों में बेचे जा रहे हैं. इससे मंडियों में अचानक फलों की इफराती हो गई है. जब बाजार में सप्लाई जरूरत से ज्यादा बढ़ जाती है, तो कीमतों में गिरावट होना स्वाभाविक है और अभी यही स्थिति देखने को मिल रही है.
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रिपोर्ट बताती है कि दिल्ली की एशिया की सबसे बड़ी फल-सब्जी मंडियों में से एक आजादपुर मंडी में भी तरबूज की कीमतों में बड़ा बदलाव देखा गया है. यहां फिलहाल एक क्विंटल तरबूज लगभग 2300 रुपये में बिक रहा है, जबकि फरवरी में इसकी कीमत करीब 3275 रुपये प्रति क्विंटल थी, यानी करीब 29 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
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हालांकि हाल की गिरावट के बावजूद तरबूज की कीमतें पिछले साल की तुलना में अभी भी ज्यादा बनी हुई हैं. मार्च 2025 में आजादपुर मंडी में तरबूज का थोक भाव करीब 1482 रुपये प्रति क्विंटल था. इस लिहाज से मौजूदा कीमतें सालाना आधार पर अभी भी ऊंचे स्तर पर मानी जा रही हैं.
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थोक बाजारों में कीमतों में गिरावट के बावजूद क्विक-कॉमर्स और ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्म पर अभी इसका पूरा असर दिखाई नहीं दे रहा है. दिल्ली में कई ऐप्स पर तरबूज अभी भी 100 रुपये प्रति किलो से ज्यादा में बिक रहा है, जबकि बेंगलुरु में इसकी कीमत लगभग 80 रुपये प्रति किलो बनी हुई है.
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निर्यात ठप होने के कारण जो तरबूज और खरबूजे विदेश भेजे जाने थे
इस बीच सोशल मीडिया पर तरबूज की कीमतों को लेकर कई पोस्ट वायरल हो रही हैं. कर्नाटक की कृषि उद्यमी अरुणा उर्स ने X पर दावा किया कि कुछ क्षेत्रों में तरबूज की कीमत 7 रुपये प्रति किलो तक गिर गई है, क्योंकि मध्य-पूर्व भेजे जाने वाले फलों की खेप अब घरेलू बाजार में आ रही है.
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कुछ सोशल मीडिया यूजर्स, जो खुद को किसान बता रहे हैं, उनका कहना है कि पहले अच्छी क्वालिटी के तरबूज लगभग 25 रुपये प्रति किलो तक बिक रहे थे, लेकिन निर्यात रुकने और बाजार में अनिश्चितता बढ़ने से अब यही तरबूज 6 से 7 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहे हैं.
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