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अगले महीने ये 3 देश भेजेंगे मंगल ग्रह पर अंतरिक्ष यान, हो सकते हैं कई नए खुलासे

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2020 में यूं तो कोरोना महामारी ने दुनिया भर में लोगों का काफी नुकसान किया लेकिन इस साल कुछ सकारात्मक चीजें भी देखने को मिलीं. चीन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने मंगल ग्रह पर अपने रोबोटिक मिशन को लॉन्च किया और अब इन तीनों देशों के अंतरिक्ष यान फरवरी में मंगल ग्रह की सतह पर लैंड करने वाले हैं और इन मिशन को बाद मंगल ग्रह को लेकर कई खुलासे हो सकते हैं. 

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सबसे पहले संयुक्त अरब अमीरात का होप ऑर्बिटर मंगल ग्रह पर लैंड होगा जो 9 फरवरी को मंगल ग्रह की सतह में प्रवेश करेगा. अगर संयुक्त अरब अमीरात का ये महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट मंगल ग्रह पर सफल लैंडिंग करने में कामयाब होता है तो ये मंगल ग्रह के वातावरण और मौसम की स्थिति का जायजा लेगा और वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण जानकारियां भेजेगा. 

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इसके बाद 10 फरवरी को चीन का Tianwen-1 लैंड करने जा रहा है. इस ग्रह की परिक्रमा करने के बाद ये एक लैंडर मई के महीने में मंगल ग्रह की सतह पर भेजेगा जो मंगल ग्रह की सतह के विभिन्न सैंपल्स को इकट्ठा करेगा. चीन के लिए ये काफी चुनौतीपूर्ण मिशन भी होने जा रहा है क्योंकि ये पहली बार है जब चीन मिशन मंगल के लिए तैयार है. इस ग्रह पर सर्वाइव करना काफी मुश्किल है और इससे पहले सिर्फ नासा ही इस ग्रह पर एक से ज्यादा बार सफल लैंडिंग कर चुका है.

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इससे पहले साल 2020 में चीन Chang'e-5 मिशन के साथ ही चांद पर भी सफलतापूर्वक कदम रख चुका है. बता दें कि चीन के मंगल ग्रह मिशन का उद्देश्य इस ग्रह की मिट्टी, भूगर्भीय संरचना, पर्यावरण और वातावरण का अध्ययन करना है. इसके अलावा चांद पर पानी की खोज भी इस मिशन का हिस्सा है. पिछले साल चीन के वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि मंगल ग्रह का ये मिशन भी सफल होने जा रहा है.

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इसके बाद 18 फरवरी को नासा का प्रीसेवेरेन्स प्रोब मंगल ग्रह के जेजेरो क्रेटर पर लैंड करेगा. इस मिशन का उद्देश्य मंगल ग्रह पर सूख चुके नदी के ताल पर जीवन के संकेत तलाशना है. इस अंतरिक्षयान के साथ एक रोवर भी मौजूद है. अमेरिकन स्पेस एजेंसी के मुताबिक, ये रोवर दुनिया का पहला ऐसा रोवर होगा जो किसी दूसरे ग्रह के सैंपल्स को पृथ्वी पर लेकर आएगा.  इसके अलावा एक छोटा हेलीकॉप्टर भी इस मिशन का हिस्सा है. इसका नाम Ingenuity है. इस हेलीकॉप्टर का उद्देश्य है कि पृथ्वी के अलावा किसी दूसरे ग्रह पर कंट्रोल तरीके से सफल लैंडिंग हो पाए. अगर ऐसा होता है तो ये पहला ऐसा हेलीकॉप्टर होगा जो ये कारनामा कर पाने में कामयाब होगा.    

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