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Howrah: विदेशी पक्षियों को फिर से लुभाने लगी सांतरागाछी झील, लौट रही रौनक

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कोलकाता के हावड़ा जिले में स्थित सांतरागाछी झील में पुरानी रौनक लौटने लगी है. यहां इस बार विदेशी पक्षियों की संख्या में इजाफा हुआ है. इन पक्षियों के आने से पक्षी प्रेमियों में उत्साह नजर आ रहा है. बीते कुछ सालों में बढ़ते प्रदूषण और यहां उचित व्यवस्थाओं के न होने से इन पक्षियों ने अपना स्थान बदल दिया था, लेकिन इस बार नवंबर माह में इनका आगमन शुरू हो चुका है. ये पक्षी सर्दियों के दिनों में यहां प्रवास करेंगे. (इनपुट-बैद्यनाथ झा)

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हावड़ा जिले की सांतरागाछी झील सर्दी के मौसम में प्रवासी पक्षियों को आकर्षित करती रही है, लेकिन हाल के कुछ वर्षों में इन पक्षियों ने यहां आना बंद कर दिया था. पर्यावरणविदों ने इसकी मुख्य वजह जिले में बढ़ रहे प्रदूषण के स्तर को माना. इसके बाद प्रदूषण कम करने को लेकर कई जागरुकता अभियान भी चलाये गये. वहीं इस वर्ष कोरोना लॉकडाउन और दिवाली पर आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगने के बाद प्रदूषण का स्तर कम हुआ, तो विदेशी पक्षियों ने एक बार फिर सांतरागाछी झील की ओर अपना रुख कर लिया. 

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पर्यावरणविदों ने उम्मीद जताई है कि इस साल सांतरागाछी झील में प्रवासी पक्षियों की संख्या बढ़ सकती है. पिछले कुछ वर्षों में प्रवासी पक्षियों ने पर्यावरणीय कारणों से अपने शीतकालीन स्थलों को बदल दिया था, लेकिन इस साल सर्दियों की शुरुआत में ही प्रवासी पक्षियों ने यहां आना शुरू कर दिया है. यह झील लगभग 50 से अधिक वर्षों से प्रवासी पक्षियों के रहने के लिए सर्दियों का निवास स्थान है, लेकिन पिछले कई सालों से यहां प्रवासी पक्षियों का आना कम हो गया था, लेकिन इस साल प्रवासी पक्षियों की संख्या अच्छी रहेगी.

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हावड़ा के सांतरागाझी झील में पक्षियों की गणना आमतौर पर निजी कंपनियों की मदद से दिसंबर और जनवरी के बीच की जाती है. हालांकि, शुरू में यह पता चला रहा है कि अब तक लगभग हजारों पक्षी आ चुके हैं. वहीं पक्षियों के आने की संभावना को लेकर हर वर्ष की तरह इस बार भी जलकुंभी को साफ करने का काम समय पर शुरू किया गया है. प्रवासी पक्षियों के लिए फ्लोटिंग आइलैंड बनाने का काम पूरा हो गया है. पक्षी प्रेमी सुशील नियोगी ने कहा कि गत कई सालों से प्रदूषण बढ़ने और झील के आसापस कंस्ट्रक्शन अधिक होने की वजह से प्रवासी पक्षियों का आगमन कम हो गया था, लेकिन इस बार इनके आने की उम्मीद बढ़ गई है.

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पक्षी प्रेमी पार्थ मजूमदार ने कहा कि प्रदूषण कम होने की वजह से इस वर्ष पक्षियों का आगमन सर्दियों की शुरुआत से ही हो गया है. जनवरी के महीने तक यह संख्या बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि विदेशी पक्षी इस बार झील में आ रहे हैं, तो प्रशासन को भी इस ओर ध्यान देना चाहिये. झील के आस-पास के इलाके में ड्रेनेज की व्यवस्था नहीं है. आस-पास के इलाकों का गंदा पानी झील में डाला जा रहा है, इससे झील में रहने वाले जीव-जन्तु मर रहे हैं.

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