महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के बोथी गांव के लोग बीते दो दिन से दहशत के साए में जी रहे हैं. दरअसल, इन गांव वालों ने 27 फरवरी की आधी रात को धरती के नीचे भारी गड़गड़ाहट की आवाज़ सुनी. ये रहस्यमयी आवाज़ सुबह साढ़े तीन बजे से 4 बजे तड़के तक रुक-रुक कर सुनी गई.
इस आवाज़ को सुन कर गांव के लोग जाग गए और घर से बाहर निकल कर इधर-उधर भागने लगे लेकिन गांव वालों को हैरानी तब हुई जब उन्होंने सुबह कहीं से भी भूकंप के झटकों जैसी कोई खबर कहीं नहीं देखी. फिर इस आवाज़ का रहस्य क्या था, आजतक/इंडिया टुडे ने उसकी तह तक जाने की कोशिश की.
बोथी गांव में करीब 2000 लोग रहते हैं. गांव वालों ने अगले दिन तहसीलदार कैलाश चंद्र वाघमारे को घटना के बारे में जानकारी दी. वाघमारे पुलिस इंस्पेक्टर विकास थोराट और राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस इंस्पेक्टर थोराट ने आजतक/इंडिया टुडे को बताया कि उन्होंने गांव वालों से जाकर बात की.
आजतक/इंडिया टुडे ने रिटायर्ड भूकंप विज्ञानी अरुण बापट से इस संबंध में बात की. बापट के मुताबिक तीन दशक पहले बासमत गांव में भी ऐसी आवाज सुनाई दी थी. बोथी गांव से बासमत 40 किलोमीटर दूर है. बापट के मुताबिक तब वो खुद बासमत गांव गए थे.
तेज गड़गड़ाहट के कारण को स्पष्ट करते हुए बापट ने बताया, 'बोथी और उसके आसपास का इलाका घाटी जैसा है. यहां पानी के कई स्रोत्र हैं. पानी ऊंचे स्थान से अंडाकार घाटी में आकर ज़मीन के नीचे एकत्र होता है. यहां जमीन की बनावट बहुत छिद्र वाली है. धरती के नीचे चट्टाने भी सुराखों वाली हैं. इस तरह ज़मीन के नीचे सोखा हुआ पानी निर्वात में छोटे-छोटे कणों के तौर पर रहता है. वहां पानी लंबे वक्त तक रहता है. लेकिन जब धरती का तापमान अचानक बढ़ता है तो निर्वात में पानी के कण वाष्पित होकर भाप के बादल जैसे बन जाते हैं. ये भाप के बादल ज़मीन के नीचे इधर-उधर होते हैं तो भारी गड़गड़ाहट की आवाज़ उत्पन्न करते हैं.' (Demo Photo)
पुणे निवासी बापट के मुताबिक, बोथी गांव में सुनी गई गड़गड़ाहट की आवाज को लेकर चिंता करने जैसी कोई बात नहीं है. उन्होंने कहा, 'अब गर्मी दस्तक देने लगी है और अचानक तापमान ने बढ़ना शुरू किया. इसलिए बोथी और आसपास के इलाके में ज़मीन के नीचे गड़गड़ाहट की आवाज सुनाई दी.'
पुलिस इंस्पेक्टर थोराट ने बताया, 'ऐसी आवाज पास के गांवों में भी सुनाई दी गई. कुछ गांव वाले जाग गए और खुले मैदान की ओर दौड़ने लगे.' (Demo Photo)
इस घटना पर आजतक/इंडिया टुडे ने पुणे स्थित भूकंप विज्ञान विभाग से भी जानकारी लेनी चाही. लेकिन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि जो मशीन हल्के से हल्के भूकंप को रिकॉर्ड करती है उसके ग्राफ पर कोई हलचल नहीं देखी गई. यानि बोथी गांव के नीचे सुनाई दी गड़गड़ाहट को भूकंप के झटके नहीं माना जा सकता. (Demo Photo)