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IIT इंजीनियरों ने बनाया ऐसा सिस्टम, दूर से ही हो जाएगा कोरोना टेस्ट

aajtak.in
  • 26 अप्रैल 2020,
  • अपडेटेड 9:35 AM IST
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पूरी दुनिया इस वक्त कोरोना वायरस महामारी से लड़ रही है. ऐसे में रोपड़ आईआईटी के दो इंजीनियरों ने एक ऐसी डिवाइस को बनाने में सफलता प्राप्त की है जो मात्र स्कैन करके 2 मिनट में बता देगा कि वह व्यक्ति कोरोना संक्रमित है या नहीं. इस टेस्ट को करने के लिए किसी डॉक्टर या व्यक्ति की जरूरत नहीं होगी. यही नहीं मेट्रो स्टेशन, एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन जैसी भीड़-भाड़ की जगह पर लोगों की जांच करने में यह काफी मददगार साबित होगा.

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बताया जा रहा है कि रोपड़ के दो इंजीनियर रवि बाबू मुलावीसला और विनीता अरोड़ा ने मिलकर कोरोना वायरस (कोविड 19)  के मरीजों की जांच और उनमें कोरोना वायरस होने की संभावना को लेकर एक ऐसा डिवाइस तैयार किया है जो कि दूर से ही व्यक्ति के फेस को स्कैन करके कंप्यूटर में भेजेगा. इसमें खास बात ये है कि इस तकनीक के जरिए कहीं दूर बैठा व्यक्ति भी कंप्यूटर के जरिए 2 मिनट में पता लगा लेगा कि वह व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं.

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सबसे बड़ी बात यह है कि इन दो इंजीनियरों ने लोगों को स्कैन करने के लिए इंफ्रारेड विजन सिस्टम तैयार किया है. इसके बाद इसमें इंफ्रारेड डिटेक्टर लगाया जाएगा, जिसके बाद एयरपोर्ट, मेट्रो स्टेशन, शॉपिंग मॉल जैसी भीड़-भाड़ वाली जगहों पर यह काफी कारगर सिद्ध होगा. यह तकनीक तुरंत ही एक साथ कई लोगों का टेस्ट कर सकेगी.

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इसको तैयार करने वाले रवि बाबू ने आजतक को आईआईटी रोपड़ में डेमो करके दिखाया और इसकी तकनीक के बारे में बताया.  वहीं उनकी साथी रोपड़ में आईआईटी से दूर घर से बता रही थीं कि स्कैन होने वाला व्यक्ति बिल्कुल ठीक-ठाक है या नहीं. उन्होंने बताया कि बेंगलुरु की एक कंपनी के साथ इस तकनीक को लेकर समझौता हुआ है जो क्लिनिकल टेस्ट के बाद बाजार में उतार दी जाएगी. इस तकनीक के जरिए बहुत ही महत्वपूर्ण परिणाम सामने आएंगे.

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इंफ्रारेड विजन सिस्टम में एक लैपटॉप एक मोबाइल और एक इंफ्रारेड  डिटेक्टर का प्रयोग किया जाएगा. इससे माथे का टेंपरेचर और नाक का टेंपरेचर लिया जाएगा, जिसमें लगभग 2 डिग्री या 4 डिग्री तक का फर्क दिख जाएगा. अगर उससे ज्यादा नाक ठंडी है तो उसको कोरोना संक्रमित समझा जा सकेगा तथा क्लिनिक टेस्ट के लिए भी भेजा जा सकता है या फिर उस व्यक्ति को उपचार के लिए भेजा जा सकता है. आने वाले समय में यह काफी कारगर साबित हो सकता है. इस तकनीक को आसानी से छोटे स्थान से लेकर बड़े स्थान पर लगाया जा सकता है.

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