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कोरोना ने प्राइवेट टीचर्स से छीना रोजगार, फुटपाथ पर दुकान लगाकर कर रहे गुजारा

aajtak.in
  • 28 अगस्त 2020,
  • अपडेटेड 5:56 PM IST
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मध्य प्रदेश राज्य के बड़वानी जिले में कोरोना महामारी के चलते निजी स्कूल बंद हैं जिसका सीधा असर जहां बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है तो वहीं निजी स्कूल में काम करने वाले शिक्षकों के सामने भी रोजी रोटी का संकट गहरा रहा है. सेंधवा के एक निजी शिक्षक पिछले 6 महीने से स्कूल बंद होने के चलते फुटपाथ पर कपड़ों की दुकान लगाने को मजबूर हैं. उनका कहना है कि सरकार हमारी मदद करें. साथ ही वह यह भी कहते हैं कि हम बच्चों का भविष्य निर्माण करते हैं लेकिन अब हमारा ही भविष्य खतरे में नजर आ रहा है. (बड़वानी से जैद अहमद शेख की रिपोर्ट)

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सेंधवा की इंदिरा कॉलोनी में रहने वाले पेशे से शिक्षक जितेंद्र सिंह राठौर जो कि पिछले 10-12 साल से निजी स्कूलों में शिक्षक की भूमिका अदा कर रहे थे. कोरोना महामारी के चलते मार्च महीने से बंद स्कूल अब तक शुरू नहीं हो पाये हैं जिसके चलते जितेंद्र के सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ. अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए जितेंद्र रोजगार की तलाश में जुट गए लेकिन जब कहीं कुछ नजर नहीं आया तो आखिरकार वह फुटपाथ पर कपड़ों की दुकान लगाने लगे.

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जितेंद्र का कहना है कि व्यवसाय करने का उनके पास अनुभव नहीं है. इसके लिए उन्हें दिक्कतें भी आ रही हैं. सरकार से जितेंद्र मांग करते हैं कि उनकी मदद की जाए ताकि वह अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें. जितेंद्र कहते हैं कि शिक्षक बच्चों के भविष्य का निर्माण करते हैं लेकिन हाल फिलहाल उनका ही भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है तो हम बच्चों का भविष्य कैसे संभालेंगे. 

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जितेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि निजी स्कूल बंद होने के चलते कई निजी शिक्षकों के सामने रोटी रोजी का संकट गहरा गया है. अब जरूरत इस बात की सरकार निजी शिक्षकों पर ध्यान दें और इनके मदद के लिए सामने आए ताकि बच्चों के भविष्य निर्माण करने वाले शिक्षकों का भविष्य अंधकारमय ना हो. इस लॉकडाउन में दिक्कत तो यह है कि मैं 10-12 साल से निजी स्कूल में शिक्षक था पर स्कूल 22 मार्च से बंद हो गया. तब से अभी तक स्कूल खुल नहीं पाये हैं जिसके कारण मेरे परिवार की गुजर-बसर तक नहीं हो पा रही है.
 

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जितेंद्र सिंह राठौड़ ने आगे ने बताया कि मुझे नए काम धंधे की तलाश में इधर-उधर भटकना पड़ रहा है. जैसे-तैसे मैंने कुछ रोजगार खोला भी है पर अनुभव की कमी के चलते मैं उस रोजगार में अपने आप को अच्छे से प्रस्तुत नहीं कर पा रहा हूं. अभी मैं कपड़े का व्यापार कर रहा हूं. छोटा-मोटा ठेला लगा रहा हूं. अगर सरकार से हमें भी कुछ भी मदद मिलगी तो हम परिवार का भरण पोषण और बच्चों का भविष्य निर्माण अच्छे से कर सकेंगे. 

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