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काबुल: जिसका डर था वही हुआ, तेजी से विस्तार कर रहा आतंकी संगठन आईएसआईएस-के

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 23 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 5:01 PM IST
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अफगानिस्तान में तालिबान का राज आते ही लोगों की आशंका अब सच साबित हो रही है. अफगानिस्तान में आंतकी संगठन आईएसआईएस-के विस्तार कर रहा है और तेजी से जिहादियों की भर्ती कर रहा है. (तस्वीर - Getty)
 

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आईएसआईएस-के पूरे एशिया से जिहादियों को अपने संगठन में भर रहा है ताकि वह तालिबान के खिलाफ एक क्रूर गुरिल्ला युद्ध शुरू कर सके. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इससे आने वाले समय में आतंकी हमलों में बढ़ोतरी हो सकती है. (तस्वीर - Getty)
 

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द सन की रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में बने आईएसआईएस-के ने पिछले महीने काबुल हवाई अड्डे पर एक बम हमले में कम से कम 180 लोगों की जान ले ली थी. इसके ठीक एक सप्ताह बाद ही एक अन्य आतंकी हमले में एक बच्चे सहित कम से कम सात लोग मारे गए थे. (तस्वीर - Getty)

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अब ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर आईएसआईएस-के तालिबान के खिलाफ ही क्यों लड़ाई छेड़ना चाहता है. विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे तालिबान में कुछ कट्टरपंथियों के बदलते नजरिया को जिम्मेदार बताया जा रहा है. (तस्वीर - Getty)

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विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआईएस-के या इस्लामिक स्टेट खुरासान तालिबान को "उदारवादी" के रूप में देखता है जो लड़कियों को शिक्षित करने की अनुमति देता है और यहां तक ​​कि गैर-मुस्लिम पश्चिमी देशों के साथ बातचीत भी करता है. यही वजह है कि अब ये तालिबान के खिलाफ भी लड़ाई लड़ना चाहते हैं और कट्टर इस्लामिक स्टेट बनाना चाहते हैं. (तस्वीर - Getty)

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हेनरी जैक्सन सोसाइटी के रिसर्च फेलो डॉ रकीब एहसान का कहना है कि यह आतंकी समूह दक्षिण और मध्य एशिया से जिहादियों की भर्ती कर रहा है, जिसका अफगानिस्तान में नए शासन से "मोहभंग" हो गया है. (तस्वीर - Getty)

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उन्होंने द सन को बताया, "आईएसआईएस-के तालिबान से अलग सोच रखता है. "उनका अंतिम लक्ष्य एक वैश्विक इस्लामी शासन स्थापित करना है, जबकि तालिबान पूरी तरह से अफगानिस्तान में शरिया कानून को लागू करने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहा है. (तस्वीर - Getty)
 

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आईएसआईएस-के का मानना ​​​​है कि तालिबान अब उधारवादी बनकर इस्लामिक नियमों के खिलाफ काम कर रहा है जो इस्लाम को धोखा देता है. इनका मानना है कि "इस्लामिक स्टेट पश्चिमी सभ्यता के विनाश पर केंद्रित है." अफगानिस्तान में ISIS-K के लगभग 2,200 सदस्य हैं, जिनमें से अधिकांश पहाड़ी देश के पूर्व में नंगहर प्रांत में रहते हैं. (तस्वीर - Getty)

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एहसान के मुताबिक आतंकी संगठन मुख्य रूप से अफ़ग़ान तालिबान, पाकिस्तानी तालिबान और इस्लामिक मूवमेंट ऑफ़ उज़्बेकिस्तान (IMU) के पूर्व सदस्यों को जोड़कर बड़ा समूह बना रहा है. (तस्वीर - Getty)

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