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खरगोश को गाजर खिलाने पर भड़के सांसद, कहा- इसे कानूनी संरक्षण की जरूरत

aajtak.in
  • नई दिल्ली,
  • 11 जुलाई 2021,
  • अपडेटेड 12:24 AM IST
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दुनिया में ज्यादातर लोगों को घरों में जानवर पालना बेहद पसंद होता है. जहां ज्यादातर लोग पालतू जानवर के तौर पर घर में कुत्ता रखते हैं वहीं कुछ लोगों को खरगोश को घर में रखना पसंद होता है. लेकिन ब्रिटेन में खरगोश को लेकर कानूनी जंग छिड़ी हुई है. (सभी तस्वीरें - Getty)

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विशेषज्ञों और सांसदों का दावा है कि देश में पालतू खरगोशों के साथ 'द्वितीय श्रेणी के जानवर' के रूप में व्यवहार किया जा रहा है और उन्हें बेहतर कानूनी संरक्षण की आवश्यकता है.

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पशु कल्याण के लिए सर्वदलीय संसदीय समूह का कहना है कि ब्रिटेन के दस लाख घरेलू खरगोशों को नियमित रूप से गलत भोजन दिया जाता है जिसमें उन्हें गाजर खिलाना भी शामिल है. इतना ही नहीं खरगोश को लेकर कहा गया है कि अक्सर अनुपयुक्त झोपड़ियों में अकेले सीमित रहने पर वो अवसाद से पीड़ित हो जाते हैं.

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ब्रिटेन में खरगोशों की भलाई के लिए एक नई आचार संहिता का मसौदा तैयार किया है जिसमें खरगोशों को कुत्तों, बिल्लियों और घोड़ों के समान सुरक्षा देने का आह्वान किया गया है.

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रैबिट वेलफेयर एसोसिएशन के पशु चिकित्सक डॉ रिचर्ड सॉन्डर्स ने खरगोशों की भलाई के लिए मार्गदर्शन दस्तावेज तैयार करने में अहम भूमिका निभाई है. उन्होंने कहा, 'खरगोश कल्याण अन्य पालतू जानवरों के मुकाबले पीछे है क्योंकि उनकी संख्या कुत्ते और बिल्लियों की तुलना में कम है.

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उन्होंने कहा, कई वृद्ध लोगों को याद होगा कि खरगोशों को बगीचे में एक झोपड़ी में अकेला रखा जाता था और खाने के लिए सब्जियों के टुकड़े दिए जाते थे, लेकिन जब आप उनकी जरूरतों को देखते हैं, तो आप महसूस करते हैं कि यह उनके लिए पूरी तरह से अनुचित था.

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विशेषज्ञों का कहना है कि खरगोशों का गाजर कुतरना भी खतरनाक है, क्योंकि वो मीठा होता है और खरगोश के दांतों को नुकसान पहुंचाता है. उनके दांतों को मोटा बना देता है.
 

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खरगोशों के लिए जो नया कानून लाने की मांग सांसद कर रहे हैं उसे विशेषज्ञ पशु कल्याण अधिनियम 2006 के तहत शामिल कराना चाहते हैं. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को एक खरगोश रखने से प्रतिबंधित करना है. स्विट्जरलैंड में पहले से ही ऐसे कानून की जरूरत बताई गई है क्योंकि जानवर अकेले अवसाद से पीड़ित हो जाते हैं.
 

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