न कोई हॉर्न, न कोई जाम; दुनिया का इकलौता देश जहां नहीं है एक भी ट्रैफिक लाइट, भारतीयों के लिए है वीजा फ्री

अगर आप भी ट्रैफिक लाइट और हॉर्न की पो-पो से परेशान हो जाते हैं तो आपको एक बार इस देश में जरूर घूमने जाना चाहिए. जहां पर न तो कोई ट्रैफिक लाइट है, न जाम और न ही हॉर्न की आवाज सुनाई देती है. सबसे अच्छी बात यह है कि यह देश भारत के एकदम पास है और जहां जाने के लिए आपको किसी पासपोर्ट की भी जरूरत नहीं पड़ेगी.

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भूटान का अनोखा ट्रैफिक सिस्टम वर्ल्ड फेमस है. (PHOTO:ITG) भूटान का अनोखा ट्रैफिक सिस्टम वर्ल्ड फेमस है. (PHOTO:ITG)

प्रियंका

  • नई दिल्ली,
  • 07 अप्रैल 2026,
  • अपडेटेड 11:30 AM IST

सड़कों पर निकलते ही गाड़ियों का जाम, हॉर्न की आवाज से ही सिरदर्द होने लगता है, कहीं जाने से पहले दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों में रहने वाले 10 बार सोचते हैं. सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के ज्यादातर बड़े शहरों का यही हाल है. ट्रैफिक लाइट्स रोजाना की जिंदगी का अहम हिस्सा होती हैं. लाल, पीली और हरी बत्तियों के बिना ट्रैफिक को कंट्रोल करना लगभग नामुमकिन माना जाता है और इसके बावजूद भी भारत में तो ट्रैफिक का बुरा हाल है.

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लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसा देश भी है, जहां आज तक एक भी ट्रैफिक लाइट नहीं है? वहां जाने वाले लोग इस बात को देखकर काफी हैरान भी होते है, लेकिन इसके साथ ही सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि वहां पर ना तो ट्रैफिक जाम होता है और न ही किसी हॉर्न की आवाज सुनाई देती है. अगर आप भी अपनी भागदौड़ भरी जिंदगी से किसी सुकून भरी जगह पर जाना चाहते हैं तो यह प्लेस आपके लिए बेस्ट होने वाला है. 

किस देश में नहीं एक भी ट्रैफिक लाइट?

इंडिया वालों के लिए सबसे अच्छी बात यह है कि यह देश उनका ही एक पड़ोसी देश है, जहां वो बिना किसी वीजा-पासपोर्ट के ही जा सकते हैं. अगर आप नेपाल या म्यांमार सोच रहे हैं तो आप गलत है. क्योंकि यह देश कोई नहीं बल्कि भूटान है, जहां पर आज के इस मॉर्डन वर्ल्ड में भी ट्रैफिक को बिना किसी ट्रैफिक लाइट के आसानी से हैंडल किया जाता है. 

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भूटान में ट्रैफिक लाइट्स नहीं है और यह वहां घूमने जाने वाले लोगों के लिए काफी शॉकिंग बात होती है, क्योंकि हर देश में ट्रैफिक लाइट्स के जरिए ही गाड़ियों के ट्रैफिक को कंट्रोल किया जाता है. मगर भूटान में आपको किसी सड़क पर लाल, पीली और हरी ट्रैफिक सिग्नल लाइट्स नहीं देखने को मिलेंगी, हालांकि इसके बाद भी वहां पर सभी गाड़ियां अपनी लेन में चलती हैं और कोई ट्रैफिक भी नहीं लगता है. यहां बड़े शहरों में हर रोज रोड पर होने वाली लड़ाइयां भी शायद ही आपको देखने को मिले. लोगों में आत्मअनुशासन और संयम इतना ज्यादा है कि ड्राइविंग के दौरान शायद ही आपको हॉर्न का शोर सुनाई दे.

भूटान का रोड कल्चर क्या है?

भूटान में सड़क संस्कृति (रोड कल्चर) परंपरा और आधुनिकता का मिक्सर है, यहां लोग अपनी संस्कृति को बचाते हुए धीरे-धीरे विकास कर रहे हैं. यहां सड़क पर गाड़ी, पैदल चलने वाले और साइकिल चलाने वाले सभी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं. भूटान में ड्राइविंग का तरीका थोड़ा धीमा और शांत होता है, लोग जल्दबाजी नहीं करते, बल्कि सुरक्षा और दूसरों का ध्यान रखते हैं.

भूटान में कोई ट्रैफिक लाइट नहीं है.

क्यों नहीं हैं ट्रैफिक लाइट्स?

भूटान में ट्रैफिक लाइट्स न होना एक सोच-समझकर लिया गया फैसला है. साल 1995 में राजधानी थिम्फू में ट्रैफिक लाइट लगाई गई थी, लेकिन लोगों को यह पसंद नहीं आई. लोगों का मानना था कि इससे इंसानों के बीच का जुड़ाव खत्म हो जाता है, इसके अलावा लोगों का मानना था कि यह उनकी संस्कृति और शहर की शांति पर असर डाल रहा है. कुछ ही समय बाद इसे हटा दिया गया और फिर कभी ट्रैफिक लाइट लगाने की कोशिश नहीं की गई.

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ट्रैफिक कैसे कंट्रोल होता है?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि बिना ट्रैफिक लाइट के ट्रैफिक कैसे कंट्रोल होता है. इसमें सबसे बड़ा हाथ ट्रैफिक पुलिस का होता है. भूटान में ट्रैफिक पुलिस चौराहों पर पारंपरिक तरीके से हाथों के इशारों से ट्रैफिक को कंंट्रोल करते हैं. उनकी ट्रेनिंग इतनी बेहतरीन होती है कि वे बड़ी आसानी से गाड़ियों की आवाजाही को बैलेंस करते हैं.

इन पुलिसकर्मियों के लिए खास तरह के बूथ भी भूटान में जगह-जगह पर बनाए गए हैं, जो शहर की खूबसूरती को और बढ़ाते हैं. जब भी कोई टूरिस्ट भूटान घूमने के लिए जाता है तो उसे ट्रैफिक को अपने हाथों के कोरियोग्राफी स्टाइल इशारों से कंट्रोल करते पुलिसवाले को देखना काफी दिलचस्प लगता है और वो अधिकतर पर्यटकों के लिए सेंटर ऑफ अट्रैक्शन भी बन जाते हैं.

ट्रैफिक पुलिस के इशारों पर पूरा शहर चलता है.

कम ट्रैफिक और अनुशासन

हर चीज को वहां के लोगों के जरिए ही बैलेंस किया जाता है और भूटान में भी ट्रैफिक लाइट्स के बिना भी बिना किसी शोर के गाड़ियों की आसानी से आवाजाही इसलिए हो पाती है. क्योंकि वहां पर एक तो गाड़ियों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है और आबादी भी बहुत कम है. लेकिन इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि लोग ट्रैफिक नियमों का पालन काफी अनुशासन के साथ करते हैं. यहां हॉर्न बजाना भी बहुत कम होता है, जिसकी वजह से वहां पर न तो प्रदूषण होता है और न ही शोर. बिना किसी शोर-शराबे के आप सुकून के साथ भूटान की खूबसूरती को निहार पाते हैं. 

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जहां आमतौर पर ट्रैफिक जाम लगने पर लोग एक-दूसरे से झगड़ना शुरू कर देते हैं, वहां भूटान में लोग बहुत धैर्य के साथ सड़कों पर गाड़ियां चलाते हैं.

इसके अलावा वहां के लोग स्पीड लिमिट का भी खास ख्याल रखते हैं, पहाड़ी रास्तों में लोग 20 से 40 की स्पीड में ही चलाते हैं और 50 से ज्यादा गाड़ियों की स्पीड आपको भूटान की राजधानी में भी नहीं देखने को मिलेगी.

दूसरे देशों को सीखनी चाहिए ये बातें

  • सड़क पर धैर्य और सम्मान जरूरी है
  • पैदल चलने वालों की सुरक्षा पहले होनी चाहिए
  • पर्यावरण का ध्यान रखना जरूरी है
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