प्रयागराज में माघ मेला चल रहा है. यहां रोजाना लाखों लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस दिव्य अनुभव के लिए आपको अपनी जेब ढीली करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है? हकीकत तो यह है कि जब मेला अपने पूरे शबाब पर है, तब भी आप मात्र 500 रुपये लेकर संगम के 'रॉयल' ठाठ का आनंद ले सकते हैं. चलिए जानते हैं कि आखिर इस भीड़भाड़ के बीच वो कौन से सीक्रेट रास्ते हैं जो आपकी ट्रिप को सस्ता और शानदार बना देंगे.
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भंडारे का स्वाद और मुफ्त रहने का इंतजाम
माघ मेले की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां कोई भी भूखा नहीं सोता. मेले के अलग-अलग सेक्टरों में बने आश्रमों और शिविरों में इस वक्त भी चौबीसों घंटे भंडारे चल रहे हैं. यही वजह है कि आपको खाने पर एक भी पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं है. यहां का सादा लेकिन शुद्ध भोजन किसी बड़े होटल के पकवानों से कम नहीं लगता. वहीं रहने की बात करें, तो मेले के कई बड़े पंडालों और सरकारी रैन बसेरों में आप अभी भी मुफ्त में या मात्र 50-100 रुपये के रजिस्ट्रेशन पर रात बिता सकते हैं. दरअसल अगर आप कल्पवासियों के शिविर में समय बिताते हैं, तो आपको भारतीय संस्कृति को बेहद करीब से देखने का मौका भी मुफ्त में मिलता है.
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नाव की सवारी में करें साइबेरियन पक्षियों का दीदार
मेले का असली आनंद संगम की लहरों के बीच है. अगर आप इस वक्त मेले में हैं, तो नाव बुक करते समय शेयरिंग का विकल्प चुनें. अकेले नाव बुक करने पर जहां 500 से 1000 रुपये लग सकते हैं, वहीं ग्रुप में या शेयरिंग बोट पर यह सफर मात्र 50 से 100 रुपये में पूरा हो जाता है. इतना ही नहीं, इन दिनों संगम पर भारी संख्या में आए साइबेरियन पक्षियों को दाना खिलाने का अनुभव भी आपकी जेब पर भारी नहीं पड़ता. मेले में घूमने के लिए आप पैदल यात्रा का आनंद लें, क्योंकि पीपे वाले पुलों (Pontoon Bridges) पर पैदल चलते हुए जो नजारा दिखता है, वो किसी गाड़ी से मुमकिन नहीं. शाम के समय जब पूरा मेला दूधिया रोशनी में नहाया होता है, तब इन पुलों से तस्वीरें लेना आपके सोशल मीडिया के लिए बेहतरीन कंटेंट साबित होगा.
मेले का विस्तार काफी बड़ा है, ऐसे में अगर आप पैदल चलते-चलते थक जाएं तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. प्रयागराज में मात्र 40 से 50 रुपये खर्च करके आप ऑटो या ई-रिक्शा के जरिए अपने गंतव्य तक आसानी से पहुंच सकते हैं. यह न सिर्फ आपके समय की बचत करेगा, बल्कि आपके बजट को भी बिगड़ने नहीं देगा.
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