जब भी हम गोवा जाने का प्लान बनाते हैं, तो दिमाग में बस समुद्र किनारे पार्टियां और बीच ही आते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि मार्च के महीने में असली गोवा बीच पर नहीं, बल्कि वहां की पुरानी गलियों और गांवों में देखने को मिलता है? अगर आप इस बार भीड़भाड़ से दूर गोवा की असली संस्कृति को महसूस करना चाहते हैं, तो वहां की बैकस्ट्रीट्स यानी छोटी-छोटी गलियों का रुख करें.
मार्च में होने वाला 'शिग्मोत्सव' और स्थानीय त्योहार आपकी ट्रिप में चार चांद लगा देंगे. आइए जानते हैं कि इस मार्च आप गोवा की गलियों में कैसे मौज-मस्ती कर सकते हैं.
शिग्मोत्सव का देसी अंदाज
यह गोवा की अपनी होली है और वहां का सबसे बड़ा पारंपरिक त्योहार माना जाता है. अगर आप इसका असली मजा लेना चाहते हैं, तो शहरों की भीड़भाड़ छोड़कर पोंडा या कुनकोलियम जैसे गांवों का रुख करें. इन गांवों में लोग पारंपरिक कपड़े पहनकर ढोल-ताशों के साथ घर-घर जाते हैं और जमकर नाचते-गाते हैं. इस नजारे को देखना अपने आप में एक अलग ही अनुभव होता है. वहीं, अगर आपको शानदार झांकियां देखनी हैं, तो 7 मार्च को पणजी और 14 मार्च को मडगांव में होने वाली परेड में जरूर शामिल हों.
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पणजी की रंगीन गलियों में पैदल सैर
पणजी में एक बहुत ही खूबसूरत इलाका है 'फोंटेनहास'. यहां की गलियां आपको भारत में ही पुर्तगाल की याद दिला देंगी. रंग-बिरंगे घर और पुराने स्टाइल की खिड़कियां मार्च की गुनगुनी धूप में और भी सुंदर दिखती हैं. यहां की पुरानी बेकरियों में जाना बिल्कुल न भूलें, जहां आज भी लकड़ी के चूल्हे पर 'बेबिंका' जैसी पारंपरिक मिठाइयां बनाई जाती हैं. इनका स्वाद ऐसा है कि सीधे आपके दिल में बस जाएगा.
फेनी और उराक का असली स्वाद
मार्च में गोवा में 'स्पिरिट ऑफ गोवा' फेस्टिवल होता है. यहां आपको गोवा की खास ड्रिंक 'फेनी' और 'उराक' को करीब से जानने और चखने का मौका मिलेगा. साथ ही, यहां स्थानीय कलाकारों का संगीत और हाथ से बनी चीजें भी देखने को मिलेंगी.
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मडगांव की पुरानी हवेलियां
मडगांव की पुरानी गलियों में घूमते हुए आपको ऐसा लगेगा जैसे आप वक्त में काफी पीछे चले गए हों. यहां के पुराने घर और हवेलियां आज भी अपनी शान बिखेरती हैं. बस, इन गलियों में टहलते-टहलते यहां के लोकल सीफूड और पारंपरिक 'विंडालू' का स्वाद चखना न भूलें, यह आपकी ट्रिप का मजा दोगुना कर देगा.
शहरों की चमक-धमक वाली होली तो आपने कई बार देखी होगी, लेकिन इस बार सांगुएम जैसे अंदरूनी गांवों में जाकर देखिए. यहां की होली एकदम अलग और देसी होती है, जहां लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और लोक संगीत की धुन पर जमकर थिरकते हैं.
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