दुनिया में बहुत कम ऐसे देश हैं जिनका इतिहास अफगानिस्तान जितना पुराना और दिलचस्प है. पहाड़ों और रेगिस्तानों के बीच बसे इस देश को लेकर अक्सर हमारे मन में युद्ध और डर की तस्वीर आती है. लेकिन सच यह है कि इस खौफ के पीछे एक ऐसी खूबसूरती भी छिपी है, जो सदियों से लोगों को हैरान करती रही है.
यह देश पुराने व्यापारिक रास्तों का केंद्र रहा है, जहां कभी अलग-अलग धर्मों और साम्राज्यों का मेल होता था. हालांकि, पिछले कुछ दशकों से यह देश संघर्ष और चुनौतियों से जूझ रहा है, लेकिन आज भी यहां के नजारे और ऐतिहासिक अवशेष सैलानियों को हैरान कर देते हैं.
अगर सुरक्षा और सावधानी को ध्यान में रखा जाए, तो अफगानिस्तान का इतिहास और यहां के लोगों की मेहमाननवाजी एक अलग ही अनुभव देती है. चलिए जानते हैं उन शहरों के बारे में जो आज भी अफगानिस्तान की असली पहचान हैं.
पहाड़ों के बीच बसी राजधानी काबुल
काबुल अफगानिस्तान का सबसे बड़ा और मुख्य शहर है. यह एक बड़ी पहाड़ी घाटी में बसा है जहां इतिहास और आज की चुनौतियां एक साथ देखने को मिलती हैं. भले ही जंग ने इस शहर की शक्ल बदल दी है, लेकिन यहां का 'बाबर गार्डन' आज भी बहुत सुकून देता है. इसे पुराने मुगल अंदाज में सजाया गया है. इसके अलावा शहर का नेशनल म्यूजियम और पीले रंग की 'शाह-दो शमशीरा मस्जिद' देखने लायक है. पुराने काबुल की गलियों में टहलते हुए आपको असली अफगानी जिंदगी और वहां के पुराने घरों की झलक मिलेगी.
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कला और संस्कृति का पुराना घर हेरात
ईरान के बॉर्डर के पास बसा हेरात अफगानिस्तान के सबसे पुराने शहरों में से एक है. यहां की हवाओं में आपको फारसी संस्कृति और कला का एहसास होगा. हेरात अपने खास नीले टाइल वाले काम के लिए जाना जाता है. यहां की जुमा मस्जिद इस्लामी वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना है. शहर में एक बहुत पुराना किला भी है, जिसे कहते हैं कि सिकंदर महान ने बनवाया था. यहां के बाजारों में मिलने वाले हाथ से बने कालीन और कीमती केसर पूरी दुनिया में मशहूर हैं.
बामियान की बुद्ध विरासत और नीली झीलें
बामियान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांति के लिए मशहूर है. यह कभी सिल्क रोड का एक मुख्य पड़ाव हुआ करता था. यहां की चट्टानों को काटकर महात्मा बुद्ध की विशाल मूर्तियां बनाई गई थीं, जिन्हें 2001 में तोड़ दिया गया था. आज भी उन मूर्तियों की जगह खाली है, लेकिन उन्हें देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. बामियान के पास ही 'बैंड-ए-अमीर' नेशनल पार्क है, जहां कुदरती तौर पर बनी गहरी नीली झीलें हैं. इन झीलों का नजारा इतना सुंदर है कि आप अपनी सारी थकान भूल जाएंगे.
नीली मस्जिद की रौनक वाला शहर मजार-ए-शरीफ
उत्तरी अफगानिस्तान में बसा यह शहर देश के सबसे शांत और सुरक्षित इलाकों में से एक माना जाता है. यहां की असली पहचान 'ब्लू मस्जिद' है, जो आसमानी और गहरे नीले रंग की टाइलों से पूरी तरह ढकी हुई है. जब सूरज की रोशनी इन पर पड़ती है, तो पूरी मस्जिद खूबसूरती से चमक उठती है. यह जगह सिर्फ इबादत के लिए नहीं है, बल्कि स्थानीय लोग यहां सुकून से बैठने और आपस में मिलने-जुलने भी आते हैं. काबुल या कंधार जैसे बड़े शहरों के मुकाबले यहां का माहौल काफी हल्का-फुल्का और रिलैक्स्ड रहता है.
परंपराओं का गढ़ कंधार
आधुनिक अफगानिस्तान की पहली राजधानी रहा यह शहर आज भी पश्तून संस्कृति और पुरानी परंपराओं का सबसे बड़ा केंद्र है. यहां की ऐतिहासिक इमारतें और प्राचीन किले आज भी बीते दौर की मजबूती और गौरव की कहानी बयां करते हैं. शहर में स्थित 'चादर शरीफ' मजार को बेहद पवित्र माना जाता है, जहां लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है. अगर आप यहां के बाजारों में घूमें, तो आपको पुराने अंदाज की दुकानों पर बेहतरीन कपड़े, खुशबूदार मसाले और हाथ से बनी शानदार चीजें आसानी से मिल जाएंगी.
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पुराने राजाओं की निशानी गजनी
गजनी किसी जमाने में बहुत शक्तिशाली साम्राज्य की राजधानी हुआ करता था. आज भले ही शहर का बहुत सा हिस्सा पुराना हो चुका है, लेकिन यहां की ऊंची मीनारें और पुराने मकबरे उस दौर की याद दिलाते हैं जब यह शहर कला और ज्ञान का केंद्र था. शहर के बाहर मैदानों में खड़ी मीनारें आज भी लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं.
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