Prayagraj Magh Mela 2026: आंकड़े कई बार आपको चौंका देते हैं. साल 2025 का एक डेटा कहता है कि हिंदुस्तान के लोगों ने घूमने के लिए गोवा के समंदर या कश्मीर की बर्फीली वादियों से ज्यादा 'कुंभ नगरी' प्रयागराज को सर्च किया है. लोग अब सिर्फ छुट्टियां नहीं बिताना चाहते, बल्कि उस शांति और विरासत को महसूस करना चाहते हैं जो सिर्फ इस शहर की गलियों में मिलती है. 3 जनवरी 2026 से प्रयागराज में माघ मेले का आगाज हो चुका है. 15 फरवरी तक चलने वाले इस आस्था के महाकुंभ में अगर आप भी घूमने का मन बना रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए ही है.
दरअसल, प्रयागराज सिर्फ एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, आध्यात्म और सांस्कृतिक विरासत का एक ऐसा संग्रह है जहां गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती का मिलन होता है. लेकिन, यहां की यात्रा तब तक अधूरी है जब तक आप संगम की लहरों से बाहर निकलकर इस शहर की उन ऐतिहासिक इमारतों और पार्कों के बारे में नहीं जान लेते, जो सदियों की कहानियां खुद में समेटे हुए हैं. यहां हर मोड़ पर एक नई कहानी खड़ी मिलती है. तो चलिए, विस्तार से जानते हैं उन 5 जगहों के बारे में जहां आपको प्रयागराज की असली आत्मा के दर्शन होंगे.
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1. त्रिवेणी संगम
प्रयागराज की पहचान और दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक मिलन बिंदु है त्रिवेणी संगम. यहां गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती का मिलन सिर्फ तीन धाराओं का जुड़ना भर नहीं है, बल्कि यह करोड़ों हिंदुओं की अटूट आस्था का वो केंद्र है, जहां आकर समय भी ठहर सा जाता है. माघ मेले के दौरान तो यहां की रौनक ऐसी होती है कि पूरी दुनिया सिमटकर इसी तट पर आ गई हो. ऐसी मान्यता है कि संगम के इस पवित्र जल में एक डुबकी लगाने से न केवल बरसों के पाप धुल जाते हैं, बल्कि इंसान एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठता है. आप यहां आएं तो नाव की सवारी करना कतई न भूलें, क्योंकि सूर्यास्त के समय नाव पर बैठकर संगम का वो जादुई नजारा देखना एक ऐसा अनुभव है, जो ताउम्र आपके जहन में एक खूबसूरत याद की तरह ताजा रहेगा.
2. चंद्रशेखर आजाद पार्क
शहर के शोर-शराबे और भीड़भाड़ से दूर अगर आप कुछ पल शांति से बिताना चाहते हैं, तो चंद्रशेखर आजाद पार्क जरूर जाइए. यह सिर्फ घूमने-फिरने की जगह या कोई मामूली पार्क नहीं है, बल्कि उस महान क्रांतिकारी की बहादुरी का गवाह है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए हंसते-हंसते अपनी जान दे दी. यहां पार्क के बीचों-बीच लगी आजाद की विशाल प्रतिमा और चारों तरफ फैली घनी हरियाली आपको सुकून तो देती ही है, साथ ही सीना गर्व से चौड़ा भी कर देती है. शाम के वक्त यहां ठंडी हवा के बीच टहलना और अपने देश के गौरवशाली इतिहास को याद करना, वाकई एक ऐसा एहसास है जो दिल को छू जाता है.
3. ऑल सेंट्स कैथेड्रल
प्रयागराज में पत्थर पर की गई बारीक नक्काशी और रंगीन कांच वाली खिड़कियों का ऐसा बेमिसाल नजारा आपको शायद ही कहीं और देखने को मिले. इसे अक्सर लोग 'पत्थर का गिरजाघर' भी कहते हैं और यह उत्तर भारत के सबसे सुंदर चर्चों में से एक माना जाता है. इसे पुरानी खास शैली (नव-गोथिक) में बनाया गया है, जो ब्रिटिश दौर की शानदार इंजीनियरिंग की याद दिलाता है. यहां की सबसे बड़ी खूबी है यहां का बेहद शांत माहौल, जो आपको शोर-शराबे से दूर मन की शांति और सुकून देता है. अगर आप पुरानी इमारतों को देखने के शौकीन हैं या बस कुछ पल शांति के साथ बैठना चाहते हैं, तो यहां की खूबसूरती आपको सच में हैरान कर देगी.
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4. इलाहाबाद किला
यमुना नदी के ठीक किनारे सीना ताने खड़ा यह विशाल किला आपको सीधे 16वीं शताब्दी की यादों में ले जाएगा. इसे मुगल बादशाह अकबर ने अपनी सुरक्षा और मजबूती के लिए बनवाया था. इसकी ऊंची और मोटी दीवारें आज भी उस दौर की भव्यता और ताकत की कहानी बयां करती हैं. हालांकि सुरक्षा कारणों से इस किले का कुछ हिस्सा सेना के पास रहता है, लेकिन इसकी बनावट और इसके पास मौजूद 'सरस्वती कूप' जैसी जगहें देखने के लिए लोग दूर-दूर से यहां खींचे चले आते हैं. अगर आपको इतिहास की पुरानी कहानियों को करीब से महसूस करना पसंद है, तो यह किला आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.
5. आनंद भवन
नेहरू-गांधी परिवार का पैतृक घर रहा आनंद भवन अब एक शानदार संग्रहालय बन चुका है, लेकिन इसकी अहमियत किसी तीर्थ से कम नहीं है. भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान यहां ऐसी कई बड़ी मीटिंग्स हुई थीं, जिन्होंने देश की तकदीर बदल कर रख दी. यहां रखी पुरानी तस्वीरें, दस्तावेज और पंडित नेहरू का निजी सामान आपको उस वक्त की याद दिलाएगा जब पूरा भारत अपनी आजादी के लिए संघर्ष कर रहा था. यह जगह सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि देश के राजनीतिक इतिहास को बहुत करीब से देखने और समझने का एक बड़ा मौका है.
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