बारामती: वो शहर जहां से शुरू हुई अजित पवार की सियासत, उसी मिट्टी में ली अंतिम सांस

पुणे जिले का शांत और विकसित इलाका बारामती, आज एक दर्दनाक खबर की वजह से चर्चा में है. यह वही इलाका है जिसे अजित पवार ने दशकों तक अपनी राजनीति और प्रशासनिक पकड़ से संवारा.

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बारामती की ये चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें (Photo: India Today) बारामती की ये चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें (Photo: India Today)

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 28 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 1:31 PM IST

पुणे जिले का वो शांत कोना, जहां नीरा नदी की लहरें गन्ने के खेतों को सींचती हैं, आज गहरी खामोशी में डूबा है. जिस मिट्टी को अजित पवार ने अपने विजन से विकास का ग्लोबल मॉडल बनाया, उसी धरती के करीब उनके जीवन का सफर एक बेहद दर्दनाक हादसे में थम गया.

बुधवार की सुबह जब बारामती में लैंडिंग के दौरान उनका विमान क्रैश हुआ, तो महाराष्ट्र ने न केवल अपना एक कद्दावर नेता खोया, बल्कि बारामती ने अपना वो शिल्पकार खो दिया जिसने इस इलाके की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल दी थी. 66 वर्ष की आयु में अजित पवार का जाना राज्य की राजनीति के एक बड़े अध्याय का अंत है.

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भौगोलिक दृष्टि से बारामती पुणे के पूर्वी बेल्ट का वो हिस्सा है, जिसे प्रकृति ने नीरा नदी के रूप में एक अनमोल वरदान दिया है. यह वही इलाका है जहां दशकों पहले सूखे की मार के कारण पवार परिवार सतारा छोड़कर काटेवाडी में आकर बसा था. नीरा नदी के किनारे बसी इस उपजाऊ मिट्टी ने ही बारामती को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाया और यहीं से संघर्ष की वो गाथा शुरू हुई, जिसने गन्ने के किसानों को एकजुट कर सहकारिता की नींव रखी. आज बारामती की पहचान देश के 'शुगर बाउल' के रूप में होती है, जहां की हरियाली मुसाफिरों का मन मोह लेती है.

बारामती का इलाका सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि आस्था का भी एक बड़ा केंद्र है. बारामती तहसील के भीतर आने वाला मोरगांव का श्री मयूरेश्वर मंदिर अष्टविनायक का प्रथम पड़ाव है, जिसकी भव्य वास्तुकला देखने दूर-दूर से श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं. इसके अलावा, बारामती शहर के आसपास का ग्रामीण परिवेश उन लोगों के लिए बेहतरीन अनुभव है जो महाराष्ट्र की असली संस्कृति और 'विलेज लाइफ' को करीब से देखना चाहते हैं. 

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बैलगाड़ी पर लदा गन्ना और बारामती की ग्रामीण संस्कृति (Photo: India Today)

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कैसा है पवार के सपनों का आधुनिक शहर

बारामती की सबसे बड़ी खासियत यहां का योजनाबद्ध तरीके से तैयार किया गया बुनियादी ढांचा है. अजित पवार ने यहां की सुविधाओं को इस तरह विकसित किया कि आज यहां का बस टर्मिनल और 'विद्या प्रतिष्ठान' का शैक्षणिक परिसर अपनी व्यवस्था के लिए जाने जाते हैं.

यहां की चौड़ी और साफ-सुथरी सड़कें इलाके को एक आधुनिक स्वरूप देती हैं, वहीं औद्योगिक क्षेत्र में पियाजियो (वेस्पा) जैसे प्रमुख संयंत्रों की मौजूदगी इसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है. आज वही एयरपोर्ट और वही सड़कें मातम में डूबी हैं, जिन्हें अजित पवार ने अपनी मेहनत और विजन से महाराष्ट्र के सबसे विकसित तालुकों की कतार में खड़ा किया था.
 

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