अगर आपके परिवार में किसी व्यक्ति की मृत्यु किसी दुर्घटना में हो जाती है. तो उसके फिजिकल एसेट्स जैसे जमीन, पैसे और गहने परिवार के नाम कर दिए जाते हैं. लेकिन क्या परिवार वाले उसके डिजिटल एसेट्स भी हासिल कर पाते हैं. जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम आईडी या क्रिप्टो एसेट्स?
कई मामलों में ऐसा कहा जाता है कि ये डिजिटल एसेट्स प्राइवेसी कानूनों के तहत आते हैं. जिसके कारण इन्हें परिवार को सौंपना आसान नहीं होता. इसी वजह से परिवार के लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
इस समस्या को देखते हुए सरकार एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है. जिसका नाम डिजिटल वसीयत है. इसके तहत डिजिटल एसेट्स भी परिवार के सदस्यों को सौंपे जा सकेंगे.
जानिए क्या है डिजिटल वसीयत
आज का समय पहले जैसा नहीं रहा. पहले लोगों के पास सिर्फ फिजिकल एसेट्स हुआ करते थे. लेकिन अब समय बदल गया है. आज की जनरेशन अपने इन्वेस्टमेंट्स से लेकर सोशल मीडिया अकाउंट्स तक से कमाई कर रही है.
अब हर डिजिटल एसेट की एक वैल्यू है, इसी वजह से लोग डिजिटल वसीयत की मांग कर रहे हैं. ताकि उनके डिजिटल एसेट्स भी सुरक्षित रूप से उनके परिवार तक पहुंच सकें.
डिजिटल एसेट्स हासिल करने के लिए परिवार वालों को कोर्ट से आदेश लेना पड़ता है. तभी वे लैपटॉप और अकाउंट्स तक पहुंच बना पाते हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इस मुद्दे पर गाइडलाइन्स तैयार कर रही है. जिससे यह प्रक्रिया आसान और स्मूथ हो सके. इन गाइडलाइन्स को डिजिटल वसीयत कहा जा रहा है.
इसके माध्यम से परिवार वालों को बार-बार कोर्ट के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और उनके किसी प्रिय सदस्य के डिजिटल एसेट्स आसानी से उनके नाम ट्रांसफर हो सकेंगे.
यह प्रक्रिया कुछ वैसी ही है जैसे आप अपने गहने, घर, पैसे और जमीन की वसीयत अपने परिवार के नाम करते हैं. उसी तरह अब आप अपने डिजिटल अकाउंट्स भी अपने परिवार वालों के नाम कर सकते हैं.
जानिए डिजिटल वसीयत में क्या-क्या शामिल होता है?
डिजिटल वसीयत के तहत कई तरह के डिजिटल एसेट्स शामिल किए जा सकते हैं. ताकि आप अपने परिवार के साथ अपने डिजिटल अकाउंट्स और एसेट्स सुरक्षित रूप से शेयर कर सकें.
इस तरह डिजिटल वसीयत के जरिए आपकी पूरी डिजिटल लाइफ का हिस्सा आपके परिवार तक सुरक्षित तरीके से पहुंच सकता है. ये सभी चीजें छोटी नहीं होतीं. इन डिजिटल एसेट्स के अंदर क्या पता परिवार के लिए कोई इन्वेस्टमेंट या NFT खरीदा गया हो. ऐसे एसेट्स को ट्रैक करना जरूरी है, क्योंकि मार्केट में इनकी कीमत काफी ज्यादा हो सकती है.
अब लोग धीरे-धीरे समझने लगे हैं कि सिर्फ सोना-चांदी ही नहीं, बल्कि डिजिटल एसेट्स की भी बड़ी वैल्यू है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए डिजिटल वसीयत जैसे नियम लाने की तैयारी की जा रही है. ताकि आप अपनी कीमती डिजिटल लाइफ को सुरक्षित रख सकें.
आप कैसे सुरक्षित रख सकते हैं अपने डिजिटल एसेट्स?
डिजिटल एसेट्स को मान्यता मिलने के साथ ही कुछ कंपनियों ने इस दिशा में कदम भी उठाए हैं:
इस तरह कंपनियां भी अपने यूज़र्स की डिजिटल लाइफ को सुरक्षित तरीके से उनके परिवार तक पहुंचाने के लिए कदम उठा रही हैं. ताकि किसी तरह का नुकसान न हो खासकर इस तेजी से बढ़ती टेक्नोलॉजी के दौर में.
डिजिटल वसीयत क्यों है जरूरी?
डिजिटल वसीयत एक नया और जरूरी कानून बन सकता है. अक्सर लोग अपने किसी करीबी को खोने के बाद यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि उनके अकाउंट्स, फोटो या इन्वेस्टमेंट्स का क्या होगा.
कई बार यह भी डर रहता है कि कहीं उन्होंने कोई बड़ा डिजिटल निवेश तो नहीं किया था. जिसकी जानकारी परिवार को नहीं है. इसी वजह से काफी समस्याएं सामने आती हैं.
इन सभी दिक्कतों को देखते हुए सरकार और मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी इस पर काम कर रही है. ताकि लोगों को अपने परिवार के डिजिटल एसेट्स तक आसानी से पहुंच मिल सके और भविष्य में किसी के साथ अन्याय न हो.
इसके अलावा, आप अपनी डिजिटल वसीयत खुद भी तैयार कर सकते हैं. आप जरूरी अकाउंट्स के पासवर्ड्स को कहीं सुरक्षित लिखकर किसी भरोसेमंद व्यक्ति को दे सकते हैं या किसी सुरक्षित प्लेटफॉर्म पर स्टोर कर सकते हैं.
अगर आप किसी जानकार या परिवार के सदस्य को आईडी और पासवर्ड दे रहे हैं, तो उन्हें सीधे शेयर करने से बचें. आप अकाउंट मैनेजर या अन्य टूल्स की मदद से उन्हें लिमिटेड एक्सेस दे सकते हैं. इससे न सिर्फ धोखाधड़ी का खतरा कम होगा, बल्कि आपके डिजिटल एसेट्स भी सुरक्षित रहेंगे.
दिग्विजय सिंह